Tuesday , 16 July 2019
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शिक्षक प्रतिदिन अपने कार्यों का मूल्यांकन करें : कमिश्‍नर बहुगुणा

बालाघाट, 13 जुलाई (उदयपुर किरण). शिक्षकों को शाला में प्रतिदिन बच्चों की पढ़ाई के लिये उनके द्वारा किये गये कार्यों एवं प्रयासों का मूल्यांकन करना चाहिये. उन्हें यह बात अपने जहन में उतार लेना चाहिये कि वे बच्चों का आने वाला भविष्य अच्छा बनाने के लिये कार्य कर रहे हैं. शालाओं से पढ़कर निकलने वाले बच्चे ही देश के भविष्य को नई दिशा देंगें. अत: शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को अच्छी शिक्षा दें और उन्हें अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें. उक्‍त बातें जबलपुर संभाग के कमिश्‍नर राजेश बहुगुणा ने शनिवार को माध्यमिक शालाओं के प्राचार्यों की बैठक में कही.
शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बालाघाट विकासखंड के माध्यमिक शालाओं के प्राचार्यों की बैठक आयोजित की गई. इस दौरान कमिश्‍नर बहुगुणा ने प्राचार्यों को संबोधित करते हुये कहा कि शिक्षकों को व्यवसायिक नजरिया अपनाकर अपनी शाला एवं शाला के उज्जवल भविष्य के लिये कार्य करना है. शाला परिसर स्वच्छ बना रहे इसके लिये बच्चों को नैतिक शिक्षा दें और बच्चों से बारी-बारी से शाला के शौचालय की सफाई एवं परिसर की सफाई के लिये श्रमदान करवायें. इसके लिये शिक्षकों को स्वयं आगे आकर कमान संभालना होगा. उन्‍होंने कहा कि शिक्षक इस बात की चिंता छोड़ दें कि बच्चों से शाला में सफाई कराने पर कोई शिकायत कर देगा तो कार्यवाही होगी. जबकि ऐसे मामलों में कोई कार्यवाही नहीं होगी.
बहुगुणा ने शिक्षकों से कहा कि प्रायवेट स्कूलों से अच्छा परिणाम लाने के लिये प्रतिस्पर्धा की भावना से कार्य करें. शिक्षकों के कार्यों से शासकीय शालाओं में बच्चों की संख्या बढ़ना चाहिए. सरकारी स्कूलों में असहाय एवं गरीब वर्ग के बच्चे अधिक आते है. हमें इन बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उन्‍होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होना शिक्षकों के औचित्य के लिए एक गंभीर चुनौती है. सरकारी स्कूल के शिक्षक सेवा भाव से बच्चों को पढ़ाने लगें तो प्रायवेट स्कूल उनके सामने कुछ भी नहीं है. उन्‍होंने कहा कि शिक्षक समय पर उपस्थित रहे और अपना काम जिम्मेदारी से करें तो पढ़ाई की व्यवस्था अपने आप बनने लगेगी.
उन्‍होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का वजन मापने की मशीन, उंचाई मापने का स्केल एवं आंखों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी. जिससे शिक्षक अपनी शाला के कमजोर बच्चों की पहचान कर सकेगें और स्वास्थ्य विभाग उनकी उपचार कर सकेगा. उन्‍होंने कहा कि शाला के शिक्षकों एवं बच्चों को मेरी शाला मेरी जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करना होगा.
इस दौरान कलेक्टर दीपक आर्य ने प्राचार्यों से कहा कि तकनीक के इस युग में पढ़ाई के तरीके भी बदलने लगे हैं और हमें भी इन बदलावों को अपनाना होगा. बच्चों को पढ़ाने में नई तकनीकों का उपयोग करना होगा. प्राचार्य स्मार्ट क्लास के लिये आगे आयें. उन्‍होंने बताया कि अभी प्रयोग के तौर पर जिले के 256 हाई स्कूलों एवं हायर सेकेडरी स्कूलों में वीडियो के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है. इसके बाद माध्यमिक शालाओं के लिए भी व्यवस्था की जायेगी. कार्यक्रम में अच्छा कार्य करने वाले प्राचार्यों को कमिश्‍नर ने प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किये.

 

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