कबूतरों के नाम 360 बीघा जमीन और भारी भरकम बैंक-बैलेंस, 100 साल पुरानी कबूतरान कमेटी कर रही मूक पंछियों के लिये काम

जोधपुर (Jodhpur) . जोधपुर (Jodhpur) से 90 किलोमीटर दूर ‎स्थित असोप में कबूतरों के पास 360 बीघी जमीन और करीब 30 लाख बैंक (Bank) बैलेंस करीब है. दरअसल, असोप में 100 साल से ज्यादा पुरानी एक कबूतरान कमेटी है, ‎जो इन मूक पं‎क्षियों के ‎लिये काम करती है. यही नहीं, कबूतरों की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट भी बना हुआ है जो हर साल इस जमीन को खेती के लिए किराए पर देता है. आय से कबूतरों के लिए दाना-पानी खरीदा जाता है.

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वर्तमान में असोप की यूको बैंक (Bank) शाखा में कबूतरों के नाम पर करीब 30 लाख से अधिक की राशि जमा है इसके अलावा कबूतरों के नाम कस्बे में तीन पक्की दुकानें हैं. कबूतरों की जमीन पर खेती के लिए बोली लगती है और आमदनी कबूतरों के खाते में जाती है. जमीन की कीमत 20 करोड़ से ज्यादा है. बताया जाता है कि रियासती काल में आसोप के कुछ धनाढ्य लोग जिनके कोई वारिस नहीं था, उन्होंने अपनी जमीन कबूतरों के नाम लिख दी. अब तक यह जमीन 360 बीघा हो चुकी है. कमेटी के सदस्य ने कहा कि कस्बे में 21 चबूतरे हैं जहां असंख्य कबूतर दाना चुगते हैं, यहां पर कबूतरों के लिए करीब 10 क्विंटल ज्वार डाली जाती है, जिन मोहल्लों में कबूतरों के चबूतरे बने हुए हैं, वहां रहने वाले लोग लोगों पर भी प्रतिदिन कबूतरों के लिए डालने की जिम्मेदारी निभाते हैं.

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उन्होंने बताया ‎कि करीब 10 11 साल पहले एक बार अकाल के चलते अशोक कस्बे में संचालित की जा रही भगवान कृष्ण गोशाला की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी और गौशाला में चारा भी खत्म हो गया था. चारा खरीदने के लिए गौशाला समिति के पास बजट भी नहीं था, ऐसे में गांव के करोड़पति कबूतर ही काम आए इसके लिए कबूतरण ट्रस्ट ने गौशाला को 10 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की, जिससे गौशाला में पल रही गायों के लिए चारा और भूसा आदि का प्रबंध किया गया.

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