8 जनवरी महाराणा जय सिंह जयन्ती : विश्व प्रसिद्ध मानव निर्मित मीठे पानी की झील जयसमुंद्र का निर्माण करवाया था

उदयपुर (Udaipur). मेवाड़ के 59वें एकलिंग दीवान महाराणा जय सिंह जी (राज्यकाल 1680-1698 ई.स.) का जन्म पौष कृष्ण एकादशी, विक्रम संवत् 1710 को हुआ था. महाराणा जयसिंह जी की आज 367वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर (Udaipur) की और से पूजा-अर्चना रखी जाएगी.

महाराणा राजसिंह (प्रथम) के बाद उनके सुपुत्र महाराणा जयसिंह ने 1680 ई. में मेवाड़ का राज्यकार्य संभाला. महाराणा जयसिंह की पाण्डुलिपि चित्रण में बहुत रूचि थी. महाराणा जयसिंह के शासनकाल में चित्रकारों ने साहिबद्दीन और मनोहर की चित्रशैली को निरन्तर बनाये रखा. इनके शासनकाल में गजेन्द्रमोक्ष शृंखला पूरी हुई, जिसे महाराणा राजसिंह प्रथम के समय आरम्भ किया था. इसके अतिरिक्त महाभारत शृंखला (1690-1700), भगवद् गीता शृंखला (1690-1700), रघुवंश शृंखला (1690-1695), कादम्बरी शृंखला (1690-1695), पंचतंत्र शृंखला (1690-1700), पृथ्वीराज रासो शृंखला (1690) आदि का चित्रण किया गया था.

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महाराणा जयसिंह ने विश्व प्रसिद्ध मानव निर्मित मीठे पानी की झील जयसमुंद्र का निर्माण 1686-1691 के बीच करवाया था. झील पर संगमरमर के छह सुन्दर हाथी लगे हुए हैं. वर्षा जल से जब झील भर जाती है तब ये हाथी पानी में डूब जाते हैं. वि.सं. 1748 ज्येष्ठ सुदी पंचमी (ई.स. 1691, 22 मई) को महाराणा जयसिंह जी ने तालाब की प्रतिष्ठा करवाई और स्वर्ण तुलादान किया था. इस बांध पर नर्मदेश्वर शिव मन्दिर भी है, जिसका निर्माण भी महाराणा जयसिंह द्वारा शुरू किया गया लेकिन वह अपने जीवनकाल में इसे पूरा नहीं कर पाए.

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महाराणा जयसिंह ने 1687 में थूर के पास एक तालाब भी बनवाया. उन्होंने कृष्ण विहार गार्डन (वर्तमान में उदयपुर (Udaipur) केन्द्रीय कारागृह) और राजमहल में यश मन्दिर का निर्माण करवाया. महाराणा जयसिंह शांतिप्रिय, दानी, धर्मनिष्ठ और उदारवादी थे.

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