कृषि में स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध- डॉ परौदा

उदयपुर (Udaipur). महाराणा  प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर (Udaipur) मे प्रताप स्मृति व्याख्यान – 2020 मे बोलते हुए मुख्य वक्ता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक एवं सचिव डेयर,पदम भूषण डॉ आर एस परोदा  ने प्रदेश के युवाओं  का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें देश के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है. उन्होंने कहा कि यध्यपि हमारा देश हरित क्रांति के पश्चात खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है परंतु बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त गुणवत्ता युक्त भोजन की व्यवस्था एवं बेरोजगारी जैसी चुनौतियों का समाधान कृषि में ही है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 (Covid-19) जैसी विश्वव्यापी महामारी (Epidemic) के दौर में हमें वैश्विक रूप से सोचना होगा तथा स्थानीय रूप से कार्य करना होगा.

उन्होंने बताया कि आज देश की 20% अर्थात 356 मिलियन जनसंख्या युवा है इनमें से 200 मिलियन गांव में निवास करते हैं. उन्होंने कहा की केंद्र सरकार (Government) की युवाओ को कृषि मे उद्यम विकास के लिए बनाई गई आर्य, माया, स्टूडेंट रेडी जैसी अनेक परियोजनाएं गांव में युवाओं को कृषि आधारित रोजगार प्रदान करने में सक्षम है. उन्होंने देश के युवाओं से अपेक्षा जताई कि हमारे युवाओं को रोजगार प्रदाता बनना चाहिए जोकि कृषि आधारित स्वरोजगार से संभव है. उन्होंने बीटी कार्टन का उदाहरण देते हुए  बताया कि देश में कृषि विकास मैं हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने महती भूमिका निभाई है इस प्रकार की उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से कपास उत्पादन में कीटनाशकों के प्रयोग में 40% कमी आई है साथ ही उत्पादन मे  3 गुना (guna) तक वृद्धि देखी गई है. उन्होंने बताया कि हमें पोली हाउस एवं ग्रीन हाउस जैसी संरक्षित खेती को बढ़ावा देना होगा. वर्तमान मे हमारे देश  में केवल 0.5 मिलियन हेक्टेयर में संरक्षित खेती की जाती है जबकि चीन में यह क्षेत्र 2 मिलियन हेक्टेयर है अतः इसे बढ़ाकर कम से कम 2 मिलियन हेक्टेयर करने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि हमारा प्रदेश राजस्थान (Rajasthan) अनेक मामलों में अनोखा है यहां की जलवायु, मौसम, मृदा, जल उपलब्धता, कृषि, जैव विविधता एवं भौगोलिक दृष्टि से मानव समुदाय में गहरी विभिन्नता देखी जा सकती है.

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प्रदेश की इन्हीं चुनौतियों को अवसर में बदला जाना चाहिए.  उन्होंने देश के कृषि विकास के लिए कृषि में युवाओं के लिए मिशन मोड पर पृथक युवा विभाग बनाने की पेशकश रखी. डॉ परौदा ने उन्नत बीज उत्पादन, बायो पेस्टिसाइड, बायो फर्टिलाइजर, मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाओं, पौध सरंक्षण क्लिनिको की स्थापना, मूल्य आधारित कृषि प्रसार सेवाओं प्रमाणिक बीज उत्पादन नर्सरी की स्थापना अंतर देशीय जल कृषि एवं मत्स्य उत्पादन तथा पशुपालन जैसी खाद्य प्रौद्योगिकी खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के उत्पादन के लिए ग्राम आधारित रोजगार की अपार संभावनाएं जताई. डॉ परोदा ने भारत की ग्रामीण युवा शक्ति को महज सामान्य किसान के बजाय खाद्य पदार्थ उत्पादन एवं प्रसंस्करण उद्यमी के रूप में स्थापित करने का सुझाव दिया.उनके अनुसार कृषि में नवाचार के अनन्य कदम उठाने चाहिए जिसमें परिशुद्ध खेती, नगदी फसलों की खेती, कृषि में जलवायु तथा मौसम संबंधी अग्रिम जानकारी हेतु सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सम्मिलित हैं.

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कुलपति ने महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व से दृढ निश्चय, मानसिक सुदृढ़ता, आत्मविश्वास, उच्च मनोबल आदि गुणों को विद्यार्थियों द्बारा आत्मसात करने का आव्हान किया. डॉ परोदा का जीवन वृत्त प्रस्तुत करते हुए उनके कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान की भूरी भूरी सराहना की एवं प्रतिभागियों को किसान परिवारों की आमदनी दुगुनी करने हेतु संकल्पित हो कार्य करने का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया. उनके अनुसार कृषि में नवाचार के अनन्य कदम उठाने चाहिए जिसमें परिशुद्ध खेती, नगदी फसलों की खेती, कृषि में जलवायु तथा मौसम संबंधी अग्रिम जानकारी हेतु सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सम्मिलित हैं.

 इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन देते हुए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉक्टर (doctor) नरेंद्र सिंह राठौर ने महाराणा प्रताप स्मृति व्याख्यान के अवसर पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को नमन करते हुए कहा कि मुगलों से लोहा लेते हुए महाराणा प्रताप में देशभक्ति की मिसाल बना दी थी साथ ही उन्होंने जल संरक्षण टेरेस फार्मिंग जैसे कृषि के अनेक नवाचार भी स्थापित किए थे.  उन्होंने बताया कि इस व्याख्यान में पदम भूषण डॉ आर एस परोदा का व्याख्यान एक प्रशंसनीय कदम सिद्ध हुआ है उन्होंने बताया कि कृषि में नवाचार एवं कौशल विकास की अनेक संभावनाएं छिपी है उन्होंने प्रदेश के युवाओं में कृषि ज्ञान कौशल एवं कार्य करने की क्षमता के विकास की बात कही उन्होंने कहा कि हमें हमारे वैज्ञानिकों एवं कृषि शिक्षकों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर युवाओं के कौशल विकास एवं क्षमता वर्धन के लिए आगे आना होगा.

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उन्होंने बेहतर कृषि पद्धतियों के चयन मूल्य वर्धित उत्पादों आधारित लघु उद्योगों ग्रह उत्पादित खाद्य पदार्थों नवीन कृषि तकनीकों जैसे वर्टिकल फार्मिंग हाइड्रोपोनिक्स इत्यादि के साथ  साथ ही कस्टम हायरिंग की बात कही कार्यक्रम के प्रारंभ में छात्र (student) कल्याण अधिष्ठाता डॉ दीपक शर्मा ने होस्ट के रूप में वेबीनार का परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया रविवार (Sunday) के अंत में क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ एसके शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया इस अवसर पर  राजस्थान (Rajasthan) के अलावा  देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 500 से अधिक प्रतिभागियों ने वेबीनार में हिस्सा लिया. प्रारंभ में निदेशक छात्र (student) कल्याण डॉ दीपक शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया. संचालन डॉ विरेन्द्र नेपालिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ शान्ति कुमार शर्मा ने दिया..  वेबिनार मे एमपी यू ए टी के डॉ वीरेंद्र नेपालिया  सहित  अनेक  वैज्ञानिको, उच्चअधिकारियों एवं विधार्थियो ने भाग लिया.

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