म्‍यांमार में सेना की क्रूरतम कार्रवाई, 114 लोगों की जान गई

यांगून . म्यांमार में सैन्य तख्तापलट कार्रवाई के बाद आंग सांग सू ची की गिरफ्तारी के बाद लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के लिए शनिवार (Saturday) का दिन सबसे खूनी हिंसा का रहा. म्‍यांमार की सेना ने जहां वार्षिक सशस्‍त्र बल दिवस के दिन परेड निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, वहीं सड़कों पर खून की होली खेलकर कम से कम 114 लोगों को मौत के घाट उतार दिया.

देश के करीब 44 कस्‍बों और शहरों में सेना ने जमकर कत्‍लेआम मचाया. मारे गए लोगों में कथित रूप से एक 13 साल की बच्‍ची भी शामिल है जिसके घर में घुसकर सैनिकों ने उसे गोली मार दी. म्‍यांमार के सैनिकों ने मेइ खतिला के आवासीय इलाके में गोलीबारी की. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इस हिंसा में करीब 20 नाबालिग बच्‍चे भी मारे गए हैं. देश में पिछले महीने हुए तख्तापलट के विरोध में हो रहे प्रदर्शन को दबाने के लिए सैनिक और पुलिस (Police)कर्मी लोगों को गोली मार दे रहे हैं.

यांगून में मौजूदा समय के मृत्यु के आंकड़ों को एकत्रित कर रहे एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने शनिवार (Saturday) शाम तक मरने वाले लोगों का आंकड़ा 93 बताया था जो अब बढ़कर 114 हो गया है. ये मृतक करीब दो दर्जन शहरों और कस्बों से थे. यह संख्या तख्ता पलट के बाद इससे पहले के एक दिन में सर्वाधिक मौत के 14 मार्च के आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं. तब मृतकों की संख्या 74 से 90 के बीच कही जा रही थी. अपनी सुरक्षा के मद्देनजर नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करने वाला यह शोधकर्ता आम तौर पर प्रतिदिन ‘असिस्टेंस असोसिएशन ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स’ द्वारा जारी आंकड़ों का मिलान करता है. यह संस्था मृत्यु और गिरफ्तारी के आंकड़ों का ब्योरा रखती है और इसे पुख्ता सूत्र के तौर पर देखा जाता है. स्वतंत्र रूप से मौत के इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हुई है. इन हत्या (Murder) ओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा हुई है और म्यांमार में कई कूटनीतिक मिशनों ने बयान जारी किए हैं जिनमें शनिवार (Saturday) को बच्चों समेत नागरिकों की हत्या (Murder) का जिक्र है.

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म्यांमार के लिये यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ट्विटर पर कहा, ’76वां म्यांमार सशस्त्र बल दिवस आतंक और असम्मान के दिन के तौर पर याद किया जाएगा. बच्चों समेत निहत्थे नागरिकों की हत्या (Murder) ऐसा कृत्य है जिसका कोई बचाव नहीं है.’ आन सान सू ची की निर्वाचित सरकार को एक फरवरी को तख्तापलट के जरिये हटाने के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों से निपटने के लिये प्रशासन ज्यादा ताकत का इस्तेमाल कर रहा है और ऐसे में म्यांमार में मरने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है. करीब पांच दशक के सैन्य शासन के बाद लोकतांत्रिक सरकार की दिशा में हुई प्रगति पर इस सैन्य तख्तापलट ने विपरीत असर डाला है. एसोसिएशन ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स (Nurse) ने शुक्रवार (Friday) तक तख्तापलट के बाद हुए दमन में 328 लोगों की मौत की पुष्टि की थी. जुंटा प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने तख्तापलट के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों का प्रत्यक्ष जिक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने देश की राजधानी नेपीता के परेड मैदान में हजारों जवानों के समक्ष दिए भाषण में ‘राज्य की शांति एवं सामाजिक सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकने वाले आतंकवाद’ का जिक्र किया और इसे अस्वीकार्य बताया.

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इस साल के कार्यक्रम को हिंसा को उकसाने वाले के तौर पर देखा जा रहा है प्रदर्शनकारियों (Protesters) ने चेतावनी दी है कि वे तख्तापलट का दोगुना (guna) सार्वजनिक विरोध करेंगे और बड़े प्रदर्शनों का आयोजन करेंगे. प्रदर्शनकारियों (Protesters) ने अवकाश को उसके मूल नाम ‘प्रतिरोध दिवस’ के तौर पर मनाया जो द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी कब्जे के विरोध में बगावत की शुरुआत थी. सरकारी एमआरटीवी ने शुक्रवार (Friday) रात को एक घोषणा दिखाई थी और विरोध प्रदर्शनों में आगे रहने वाले युवाओं से अनुरोध किया था कि वे प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों से सबक सीखें कि उन्हें सिर में या पीठ पर गोली लगने का कितना खतरा है.

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इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों का सबसे ज्यादा शिकार प्रदर्शन में आगे रहने वाले युवा बने हैं. इस चेतावनी को व्यापक रूप से धमकी के तौर पर लिया जा रहा है क्योंकि मरने वालों में अधिकतर प्रदर्शनकारियों (Protesters) के सिर में गोली लगी थी जो इस बात का संकेत है कि उन्हें निशाना बनाया गया था. इस घोषणा में यह संकेत दिया गया कि कुछ युवा इन प्रदर्शनों को खेल समझकर हिस्सा ले रहे हैं और उनके माता-पिता और दोस्तों से अनुरोध किया कि वे उनसे इन प्रदर्शनों में शामिल न होने के लिये बात करें.

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