दिग्विजय-सिंधिया की मुलाकात मे बड़ा ट्विस्ट / सिंधिया ने जारी किया लेटर, दिग्विजय से मुलाकात का जिक्र नहीं


भोपाल . मध्यप्रदेश की सियासत में नया मोड़ आ गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने टूर प्रोग्राम में दिग्विजय सिंह से मिलने का समय नहीं दिया है. दिग्विजय सिंह ने लेटर जारी कर कहा था कि 24 फरवरी को गुना के सर्किट हाउस में वो कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात करेंगे. लेकिन अब ज्योतिरादित्य सिंधिया का टूर प्रोग्रम जारी हुआ है. इस टूर प्रोग्राम में दिग्विजय सिंह से मुलाकात का जिक्र नहीं किया है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया का टूर प्रोग्रम जारी किया गया है. इस टूर प्रोग्राम में दिग्विजय सिंह से मुलाकात का कोई जिक्र नहीं है. सिंधिया के लेटर में गुना में जनसंपर्क का उल्लेख किया गया है. जबकि दिग्विजय सिंह ने अपने लेटर में लिखा था कि 1 बजकर 15 मिनट में वो गुना के सर्किट हाउस में कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात करेंगे.

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बंद कमरे में होनी है चर्चा

दिग्विजय सिंह के कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार को गुना के सर्किट हाउस में बंद कमरे में दोनों नेताओं के बीच 45 मिनट की मुलाकात की बात कही गई है. इस मुलाकात के लिए दिग्विजय सिंह ने अपने टूर प्रोग्राम जारी किया है. इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं के बीच 45 मिनट की मुलाकात का जिक्र है. दोनों नेता दिल्ली से आ रहे हैं और इस मुलाकात के कई मायने भी निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस मुलाकात की सबसे अहम कड़ी राज्यसभा के चुनाव हैं. मध्यप्रदेश में इस बार कांग्रेस को दो सीटें मिलने की उम्मीद है. ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह दोनों ही नेता राज्यसभा के दावेदार माने जा रहे हैं. प्रदेश में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच कई बार कड़वाहटों की खबरें आई हैं.

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इन खबरों के बीच दोनों ही नेता सार्वजनिक रूप से कम मिलते हैं. इस मुलाकात का एक पहलू यह भी देखा जा रहा है कि विधायकों को एकजुट रखने के साथ दोनों नेता आपस में अपने गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश करने में लगे हैं. दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो रहा है. दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश में लगातार सक्रिय हैं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना-शिवपुरी संसदीय सीट के साथ-साथ चंबल अंचल में लगातार सक्रिय हैं. राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश की सियासत से बाहर नहीं जाना चाहते हैं और मध्यप्रदेश में अपना दखल बनाए रखना चाहते हैं. वहीं, दिग्विजय भी एमपी की सियासत में सक्रिय हैं. दोनों ही जनाधार वाले नेता हैं और जनता के बीच इनकी पकड़ अच्छी है. ऐसे में दोनों नेता अपने गिले-शिकवे दूर कर प्रदेश में समन्वय की राजनीति पर जोर देंगे.

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