Wednesday , 20 January 2021

रोजगार के बहाने नई आबकारी नीति पर प्रहार विरोध में उतरी बीजेपी-कांग्रेस

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली के लिए प्रस्तावित नई आबकारी नीति पर रोजगार में कटौती के डर के बहाने प्रहार किया जा रहा है. नई नीति से कुछ लोगों के एकाधिकार का भय और कीमतों में बढ़ोत्तरी जैसे सवालो को लेकर आबकारी नीति के खिलाफ जनमत बनाने की कोशिश की जा रही है. एक तरफ दुकानों की संख्या बढ़ने और शराब के सेवन की उम्र कम करने के प्रस्ताव पर विरोधाभासी तर्क सामने आ रहे हैं. वहीं राजस्व बढ़ाने के नाम पर हो रही कवायद को विदेशी ब्रांड को बढ़ावा देने की कोशिश बताया जा रहा है.  माना जा रहा है कि नई आबकारी नीति के प्रस्ताव पर आम लोगों की राय शुमारी के बाद भी दिल्ली सरकार को कई तरह के विरोध का सामना करना पड़ेगा. दिल्ली में मुख्य विपक्षी दल भाजपा इसके खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है.

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वहीं कांग्रेस भी नई प्रस्तावित नीति के विरोध में नजर आ रही है. शराब सेवन के लिए कम उम्र के प्रस्ताव पर कई स्वयंसेवी संगठन केंद्र सरकार (Central Government)को भी अपना प्रत्यावेदन भेज रहे हैं. वहीं मौजूदा लाइसेंस धारकों की ओर से लॉटरी सिस्टम के विरोध में दबाव बनाया जा रहा है. चर्चा के दौरान विरोध में जो तर्क दिए जा रहे हैं उनमें आबकारी से जुड़े कुछ संगठनों द्वारा करीब एक लाख लोगों की नौकरी जाने और चार लाख लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. सरकार को दिए जा रहे सुझाव में  आबकारी से जुड़े संगठनों का कहना है कि कुछ गिने-चुने लोगों को ही लाइसेंस देना, भारत में मौजूद उचित बाजार नीतियों के पूर्ण विरोध में है. यह भी कहा जा रहा है कि यदि लाइसेंस केवल कुछ निर्माताओं को दिया जाता है, तो अदृश्य एकाधिकार स्थिति के साथ शराब की कीमत में अनियंत्रित वृद्धि भी होगी.

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इन संगठनों का कहना है कि दिल्ली एनसीआर में लगभग 75 कंपनियां काम कर रही हैं, अगर उनका लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया जाएगा तो उन्हें अपनी मैनपावर में कटौती करनी होगी, जिसका मतलब है कि लगभग 100,000 लोग अपनी नौकरी गंवा देंगे और भारत जैसे देश में जहां लगभग 4 व्यक्ति एक आय पर निर्भर हैं, 400,000 लोग समस्या का सामना करेंगे. केंद्र सरकार (Central Government)के आत्मनिर्भर अभियान का हवाला देकर तर्क दिया जा रहा है कि एक तरफ मेक-इन-इंडिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है वहीं दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने को तैयारी हो रही है.  लगभग 85% बाजार भारतीय ब्रांडों और निर्माताओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है. संगठनों का दावा है कि नए प्रस्ताव सरकार को संरक्षण प्रदान करता है और इस तरह के उपाय को संस्थागत रूप प्रदान करता है कि मौजूदा बहुसंख्यक उपभोक्ता जो भारतीय ब्रांडों से हैं, उन्हें अन्य ब्रांडों के लिए मजबूर होना पड़ेगा जो विदेशी हैं.

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