दौलत बेग ओल्डी से मात्र 36 किमी दूर युद्धाभ्यास कर रहा चीन

– युद्धाभ्यास का एक वीडियो सोशल मीडिया (Media) में हो रहा वायरल

पेइचिंग . लद्दाख में जारी तनाव के बीच चीनी सेना देपसांग एरिया में महाविनाशक हथियारों के साथ युद्धाभ्यास करने में जुटी है. दावा किया जा रहा है कि चीनी सेना के युद्धाभ्यास का स्थान भारत के सबसे ऊंची हवाई पट्टी दौलत बेग ओल्डी से मात्र 36 किलोमीटर की दूरी पर है. अभ्यास वाले इलाके में पड़ी बर्फ को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीनी सेना ने इसे हाल में ही अंजाम दिया है. इस युद्धाभ्यास का एक वीडियो सोशल मीडिया (Media) में वायरल हो रहा है, जिसमें भीषण ठंड के बीच चीनी सेना पीएलए के जवान युद्धक तैयारियां करते दिखाई दे रहे हैं. इस दौरान चीनी सैनिक टैंक, तोप, मल्टी रॉकेट लॉन्च सिस्टम और एंटी एयर डिफेंस गन का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं.

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ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के ट्विटर हैंडल पर जारी वीडियो में दावा किया गया है कि चीनी सेना के युद्धाभ्यास वाली जगह भारत के सबसे ऊंचाई वाली एयरस्ट्रिप दौलत ओल्ड बेगी (डीबीओ) से मात्र 36 किलोमीटर पूर्व में है. ऐसे में यह युद्धाभ्यास भारत के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. गौरतलब है ‎कि चीन सीमा के पास स्थित दौलत ओल्ड बेगी पर चीन की पहले से ही नजर है. अभी कुछ ही दिन पहले भारतीय वायुसेना के चीफ राकेश सिंह भदौरिया भी इस एयरस्ट्रिप के दौरे पर गए थे. लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के सबसे ऊंचे इलाके के रूप में मशहूर डीबीओ चीन सीमा से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. चीन से युद्ध के दौरान दौलत ओल्ड बेगी से भारतीय वायुसेना के मालवाहक जहाजों से लेकर लड़ाकू विमान इस हवाई पट्टी का उपयोग कर सकते हैं. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान बनाई गई दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी को एयरफोर्स ने इन दिनों एक्टिव मोड में रखा हुआ है. यहां से रोज एयरफोर्स के कई हेलिकॉप्टर और जहाज टेकऑफ और लैंड कर रहे हैं.

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देपसांग पहाड़ियों के बीच स्थित जमीनी इलाका है. 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस इलाके के कुछ हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था. इस इलाके के पश्चिमी हिस्से में भारतीय सेना तैनात है जबकि पूर्वी हिस्से में चीनी सेना की पोस्ट है. यहां से भारत का रणनीतिक रूप से अहम दौलत ओल्ड बेगी एयरफील्ड भी काफी नजदीक है. चीन की चाल यहां तनाव पैदा कर दौलत ओल्ड बेगी के ऑपरेशन तैयारिकों को प्रभावित करना है. देपसांग में भी गतिरोध बना हुआ है. यहां चीनी सैनिकों ने पट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 12 और 13 पर भारतीय सेना की पट्रोलिंग को रोकना जारी रखा है. इन चारों पॉइंट्स पर इंडियन आर्मी परंपरागत तौर पर पट्रोलिंग करती आई है. गलवान के उत्तर में स्थित देपसांग रणनीतिक तौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण है. इसकी वजह यह है कि यह काराकोरम दर्रे से सटे रणनीतिक तौर पर अहम दौलत बेग ओल्डी पर भारत के पोस्ट के करीब है.

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