महासीर मछली का संरक्षण एवं संवर्धन


उदयपुर (Udaipur). प्रख्यात महासीर विशेषज्ञ एस.एन.ओग्ले ने शनिवार (Saturday) को सज्जनगढ़ स्थित पॉन्ड्स में पल रहे इन मछलियों का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान नर मछलियों में वयस्कता देखी गई लेकिन मादाओं में अभी वयस्कता नहीं आई है. मादाओं के प्रजनन अंग (अमदज) हलके गुलाबी नजर आए. ऑग्ले के अनुसार 5-6 दिन बाद ये भी प्रजनन के लिए तैयार हो सकती हैं.

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निरीक्षण के समय वन विभाग के पूर्व मुख्य वन संरक्षक राहुल भटनागर, मत्स्य विभाग के पूर्व उप निदेशक इस्माईल अली दुर्गा, वन विभाग के वर्तमान क्षेत्रीय वन अधिकारी गणेश गोठवाल तथा पर्यावरण संरक्षक वीरमदेव सिंह कृष्णावत उपस्थित रहे. महासीर विशेषज्ञ ओगले इस से पूर्व अक्टूबर 2015 में भी वन विभाग की महा सीर हेचरी का निरीक्षण कर चुके हैं, और इस विलुप्त प्राय मछली के प्रजनन सम्बन्धित महत्वपूर्ण सुझाव दे चुके हैं.

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गौरतलब है कि किसी जंगल में टाइगर का जो महत्व है, वही किसी तालाब में महासीर मछली का महत्व है. टाइगर की तरह ये मछली भी लुप्त होने के कगार पर है. इसके संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से वन विभाग में 2012 से कार्य किया जा रहा है. महासीर मछली के बच्चों को सज्जनगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में निर्मित पॉन्ड्स में चार वर्ष तक पाल कर 2016 में कृत्रिम प्रजनन कराया गया, जो सफल रहा. इस प्रजनन से उत्पन्न बच्चे अब वयस्क हो चुके हैं, जिनका अब प्रजनन कराया जाएगा.

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