अमेरिका में पाक के नए राजदूत मसूद खान की नियुक्ति पर उठा विवाद

इस्लामाबाद . पाकिस्तान का आंतक और आंतिकयों के प्रति प्रेम बार-बार उजागर होता रहता है. ताजा मामने में पाक ने आतंकियों से करीबी संबंध रखने वाले मसूद खान को अमेरिका में अपना नया दूत नियुक्त करने की घोषणा की है. यह फैसला पाक सरकार पर कट्टरपंथी इस्लामिक और आतंकी संगठनों के गहरे प्रभाव को दर्शाता है. मसूद खान की नियुक्ति पर विवाद पैदा हो गए हैं. भारत-अमेरिका सहित पाकिस्तान में भी इमरान सरकार के फैसले की आलोचना हो रही है. दरअसल वर्तमान दूत असद मजीद खान का कार्यकाल जनवरी 2022 में पूरा हो रहा है. मसूद खान की नियुक्ति की दक्षिण एशिया के कुछ एक्सपर्ट्स ने आलोचना की है.

आंतकवाद को खुला सपोर्ट करने के बावजूद पाकिस्तान के साथ संबंध रखने के अमेरिकी रवैये की भी आलोचना हो रही है. कई एक्सपर्ट्स ने मसूद खान की नियुक्ति की यह कहकर आलोचना की है कि खान एक खतरनाक अतिवादी हैं और इस्लामिक अतिवादियों के साथ काम करने का उनका पुराना इतिहास है. इसके अलावा मसूद खान की नियुक्ति के लिए इमरान खान प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा है कि यह लगातार खतरनाक होता जा रहा है. पाकिस्तानी प्रशासन इस्लामिक विचारधारा को समर्थन देने और उसके साथ मिलकर काम करने का पक्षधर है. इनमें अमेरिका में मौजूद इस्लामिक विचारधारा के भी लोग हैं.

फाइटिंग टू द एंड : द पाकिस्तान आर्मीज वे ऑफ वॉर’ और ‘इन देयर ओन वर्ड्स : अंडरस्टैंडिंग द लश्कर-ए-ताइबा’ की लेखिका क्रिस्टीन फेयर ने कहा कि मसूद खान का कट्टपंथी इस्लामी आतंकियों के साथ काम करने का लंबा इतिहास रहा है और वह खुद एक खतरनाक कट्टरपंथी हैं. फेयर के मुताबिक खान हिजबुल मुजाहिदीन का समर्थक हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन ने 2017 में एक आतंकवादी संगठन घोषित किया था. वह फजलुर रहमान खलील के करीबी रहे हैं, जिसने देवबंदी हरकत-उल-मुजाहिदीन (एचयूएम) की स्थापना की थी.

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