सीडब्ल्यूसी को आधुनिक भूमिगत कमरे का निर्माण करना चाहिए: मंत्री पीयूष गोयल

नई दिल्ली (New Delhi) . केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, रेलवे (Railway)और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने केंद्रीय भण्डारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के आधुनिकीकरण और परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजनाओं की समीक्षा की.

मंत्री गोयल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी को 2023 के अंत तक अपनी भण्डारण क्षमता दोगुनी करनी चाहिए और वित्तीय वर्ष 2024-25 तक 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार करना चाहिए. वर्तमान में सीडब्ल्यूसी की भण्डारण क्षमता 125 एलएमटी है. गोयल ने कहा कि भण्डारगृहों के टैरिफ रेशनलाइजेशन और निर्माण का काम बिना किसी नौकरशाही हस्तक्षेप के सीडब्ल्यूसी द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि संचालन के लिए निर्णय लेने की अधिकतम शक्तियां सीडब्ल्यूसी को सौंप दी चाहिए.

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वहीं मंत्री ने सीडब्ल्यूसी को प्राथमिकता के आधार पर देश में शीत भण्डारण श्रृंखलाओं के निर्माण पर भी ध्यान देने के लिए कहा. इसके अलावा उन्होंने सीडब्ल्यूसी को निर्देश दिया कि वह अपने सभी गोदामों में नियमित रूप से आग, भूकंप और दुर्घटनाओं के लिए सुरक्षा लेखा परीक्षण करें. गोयल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी को पूरे देश में गेहूं और चावल के भण्डारण के लिए भूमिगत कमरों का निर्माण करना चाहिए, जिससे देश में अधिक से अधिक अनाजों का अधिक समय तक भण्डारण किया जा सके. गोयल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी को नैफेड के साथ मिलकर प्याज, आलू और टमाटर के भण्डारण के लिए अधिक शीत भण्डारण श्रृंखलाओं का निर्माण करना चाहिए. मंत्री ने आगे सुझाव दिया कि सीडब्ल्यूसी को अपने सभी 423 भण्डारगृहों के लिए एक मास्टरप्लान तैयार करना चाहिए. वहीं सीडब्ल्यूसी को कृषि उपज के लिए भण्डारगृह/भण्डारण के बीच अंतर का विश्लेषण करना चाहिए और इसके अनुरूप वास्तुकारों एवं विशेषज्ञों की मदद से योजना तैयार करना चाहिए.

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मंत्री ने कहा कि सीडब्ल्यूसी को सभी हितधारकों यानी कर्मचारियों, ग्राहकों, कर्मियों और ट्रक चालकों की देखभाल के लिए मिशन मोड में काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी सीडब्ल्यूसी भण्डारगृहों में साफ एवं स्वच्छ वातावरण में आधुनिक एवं सहज सुविधाएं जैसे; पुरुष एवं महिला कर्मियों, ग्राहकों, वाहन चालकों और दिव्यांगों के लिए शौचालय, पर्याप्त प्रतीक्षालय/आरामगृह, वर्कर-शेड, पेयजल की सुविधाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं जरूर होनी चाहिए.

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