राम जन्मभूमि केस के वकील की वापस ली गई सुरक्षा पर पुनर्विचार करे दिल्ली पुलिस : हाईकोर्ट

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस (Police) से कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में राम जन्मभूमि मामले जुड़े वकील की निजी सुरक्षा वापस लेने के निर्णय पर पुनर्विचार करें. इस मामले में केंद्र सरकार (Central Government)और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का प्रतिनिधित्व कर चुके वकील आर. पी. मेहरोत्रा की निजी सुरक्षा वापस लेने के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार (Monday) को सुनवाई करते हुए जस्टिस रेखा पल्ली ने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए दिल्ली पुलिस (Police) को दो हफ्ते का समय दिया और कहा कि वह अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट एवं मूल रिकॉर्ड पेश करे. मामले को अगली सुनवाई के लिए 15 नवंबर को सूचीबद्ध करते हुए न्यायाधीश (judge) ने दिल्ली पुलिस (Police) के वकील से मौखिक रूप से कहा कि उनसे (पुलिस (Police)) कहिए कि फिलहाल एक सुरक्षा (कर्मी) देना शुरू करें. अदालत ने आदेश दिया कि याचिका पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने से पहले प्रतिवादी संख्या दो (दिल्ली पुलिस (Police)) को यह निर्देश देना उचित प्रतीत होता है कि वह आज से दो हफ्ते के अंदर निर्णय पर पुनर्विचार करे. याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2013 के निर्देश के आलोक में वकील को पुलिस (Police) सुरक्षा दी गई थी. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि सुरक्षा नहीं हटाई जा सकती, इसके बावजूद सुरक्षा वापस ली गई. वकील लूथरा ने मेहरोत्रा ​​के खिलाफ वर्तमान में “खतरे की आशंका” नहीं होने के पुलिस (Police) के रुख पर आपत्ति जताई और कहा कि सुरक्षा वापसी का निर्णय एक “कानूनी सलाहकार” की राय पर आधारित था, जब मामले के अन्य समान रूप से रखे गए वकीलों को अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार सुरक्षा दी जा रही थी. इस दौरान दिल्ली पुलिस (Police) के वकील समीर वशिष्ठ ने अदालत से कहा कि “सुरक्षा स्थायी नहीं हो सकती” और याचिकाकर्ता पुलिस (Police) अधिकारियों की मदद के लिए खतरे की आशंका को दिखाने के लिए कुछ सबूत प्रदान कर सकता है.

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