“जावर” को यूनेस्को वैश्विक उद्यान घोषित करने की मेवाड़ से उठी मांग

उदयपुर (Udaipur). अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा – मेवाड़ के प्रवक्ता रणवीर सिंह जोलावास ने बताया कि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा – मेवाड़ तथा प्राकृतिक धरोहर प्रभाग के साझे में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उदयपुर (Udaipur) सांसद (Member of parliament) अर्जुन मीणा एवं भाजपा देहात जिला महामंत्री चन्द्रगुप्त सिंह चौहान की अध्यक्षता में भू वैज्ञानिक एवं धरोहरविद डॉ. पुष्पेंद्र सिंह राणावत द्वारा तैयार राजस्थान (Rajasthan)की ऐतिहासिक प्राकृतिक – सांस्कृतिक विशेषताओ वाली भूधरोहर को वैश्विक भुधरोहरीय उद्यान के रूप में पहचान दिलाने के उद्देश्य से चित्र युक्त विवरणिका तथा पुस्तक का विमोचन किया गया. कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि डॉ. विनोद अग्रवाल पूर्व अधिष्ठाता विज्ञान महाविद्यालय, इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा तथा यादवेंद्र सिंह रलावता थे.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उदयपुर (Udaipur) सांसद (Member of parliament) अर्जुन मीणा ने महाराणा प्रताप की मातृ भूमि प्राचीन काल के मेवाड़ राज्य के उदयपुर (Udaipur) सम्भाग में स्थित जावर पर विवरणिका का विमोचन करते हुए कहा कि इस विवरणिका में अत्यंत रोचक जानकारियां प्रदान की गई है जो कि ऐतिहासिक महत्व के साथ, स्थानीय विशेषताओं को भी बताती है.उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस शोध को भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के समक्ष पेश करेंगे तथा ऐतिहासिक प्राकृतिक – सांस्कृतिक वैश्विक भुधरोहर “जावर” को यूनेस्को वैश्विक उद्यान घोषित करने के प्रयास के लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से आग्रह करेंगे, साथ ही इस विषय को संसद में उठाएंगे. यह प्रयास क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान तथा क्षेत्र के लोगों के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने तथा अधिक अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान करेगा.
कार्यक्रम में राजस्थान (Rajasthan)की भुधरोहर तथा पुस्तक की जानकारी देते डॉ. राणावत ने बताया कि राजस्थान (Rajasthan)केवल मानव निर्मित सांस्कृतिक धरोहर से ही नहीं वरन अनेकों प्राकृतिक धरोहर से भी सम्रद्ध है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा घोषित किए भुधरोहरीय स्मारकों में अधिकांश राजस्थान (Rajasthan)में है. दक्षिण राजस्थान (Rajasthan)के उदयपुर (Udaipur) जिले (मेवाड़) के जनजाति क्षेत्र जावर में अद्वितीय प्राकृतिक खनिज संपदा के भंडारो ने, इसे अंतरराष्ट्रीय धरोहर की पहचान दि है. पुरातात्विक अध्ययन में यह प्रमाणित कर दिया है कि विश्व में पहली बार जावर में यात्रिक जस्ता का उत्पादन आसवन प्रक्रिया द्वारा किया गया था. जावर क्षेत्र से लिए नमूनों की रेडियो कार्बन आयु गणना के आंकड़ों से ज्ञात हुआ कि इस क्षेत्र में इन गतिविधियों का प्रारंभिक इतिहास काल लगभग 500 ईसा पूर्व से लेकर मध्ययुगीन काल तक रहा है. अमेरिकन सोसायटी ऑफ मेटल्स ने जावर को अंतरराष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता दी है. अमेरिकन सोसायटी ऑफ मेटल द्वारा प्रदत प्रमाण पत्र के अनुसार इस क्षेत्र से उत्पन्न जस्ते की यूरोपीय औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
जावर ग्रामीण परिवेश की दृष्टि से भी समृद्ध है. अतः जावर को अविलंब धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया जाना चाहिए जिससे आने वाले समय में इसे यूनेस्को वैश्विक उद्यान की तर्ज पर विकसित किया जा सके, जिससे यहां पर्यटन का विकास हो तथा स्थानीय लोगों को अधिकृत आय के स्रोत प्राप्त होंगे. जावर उदयपुर (Udaipur) के निकट स्थित है जो कि एक विश्व विख्यात पर्यटन स्थल है. अतः उदयपुर (Udaipur) आने वाले पर्यटक जावर डूंगरपुर (Dungarpur) में भी आना पसंद करेंगे.
इसी प्रकार पूर्वी राजस्थान (Rajasthan)के बारां जिले में रामगढ़ के समीप एक 4 किलो मीटर व्यास का प्रियदर्शनी प्राकृतिक खट्टा है जो कि एक प्राकृतिक अजूबा माना जाता है. यह उल्का पिंडों के टकराने से, इस स्थान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है. अतः उल्कापिंड प्रहार से बने खड्डे को आमजन की जानकारी हेतु इस स्थान को भू धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देनी आवश्यक है. भारत में ऐसे केवल 3 प्राकृतिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है, जिसमे से एक राजस्थान (Rajasthan)में यह इकलौता अजूबा है.
कार्यक्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा – मेवाड़ के महामंत्री – हेमेन्द्र सिंह दवाणा, वित्त मंत्री – देवेन्द्र सिंह भाटी, संयुक्त मंत्री – विक्रम सिंह चौहान  उपमंत्री – भानुप्रताप सिंह जी थाणा, खेल मंत्री – नाहर सिंह झाला, मार्गदर्शक मंडल सदस्य नरेन्द्र सिंह शेखावत, शैलेन्द्र सिंह राणावत, रिपुदमन सिंह राठौड़, अजित सिंह जी खींची आदि मौजूद रहे.
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