कोरोना के चलते 6-12 साल के बच्चों में डिप्रेशन

न्यूयॉर्क . दुनियाभर में कोरोना को लेकर चिंता है. बुजुर्ग-बच्चे सभी इस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन एक और बड़ी समस्या है जिस पर लोगों का ध्यान कम है, लेकिन ये बढ़ती ही जा रही है. बात बच्चों में बढ़ते अवसाद की हो रही है. यह इस हद तक बढ़ गया है कि बच्चे खुदकुशी तक रहे हैं. समस्या ये है कि बड़ों की तरह बच्चों और किशोरों में इसकी पहचान आसानी से नहीं हो सकती. इसलिए परिजन के साथ-साथ डॉक्टर्स भी चिंतित हैं. वे समझ नहीं पा रहे हैं कि बच्चों की मदद कैसे करें. न्यूयॉर्क के चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट रेचेल बुशमैन का कहना है कि हम बचपन को मासूमियत से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में बच्चों में अवसाद चिंता की बात है. 6-12 साल के बच्चों में गंभीर डिप्रेशन दिखने लगा है. वहीं बच्चों में एंक्जायटी डिसऑर्डर्स और डिप्रेशन का खतरा भी है.

3 साल तक के बच्चों में अवसाद

एनवाईयू लैंगो हेल्थ में चाइल्ड एंड एडलोसेंट सायकेट्री की प्रमुख डॉ. हेलेन एगर की ताजा स्टडी के मुताबिक 3 साल तक के बच्चों में भी अवसाद दिख रहा है. चिड़चिड़ापन और गुस्सा गहरे अवसाद के लक्षण हो सकते हैं. इसी के चलते उनके मन में खुदकुशी के ख्याल आते हैं.

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