Thursday , 21 October 2021

ऊन और पोल्ट्री पंख अपशिष्ट को पशुओं के लिये चारा और उर्वरक में बदलने की एक नई विधि विकसित

नई दिल्ली (New Delhi) . भारतीय वैज्ञानिकों ने मानव बाल, ऊन और मुर्गी के पंखों जैसे केराटिन अपशिष्ट को उर्वरकों, पालतू जानवरों और जानवरों के चारे में बदलने के लिए एक नया टिकाऊ और किफायती समाधान विकसित किया है. भारत हर साल बड़ी मात्रा में मानव बाल, मुर्गी के पंखों के अपशिष्ट और ऊन के अपशिष्ट का उत्पादन करता है. इन अपशिष्ट को फेंक दिया जाता है, जमीन में दबा दिया जाता है, लैंडफिलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, या जला दिया जाता है, जिससे पर्यावरणीय खतरे, प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ जाता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि होती है. ये अपशिष्ट अमीनो एसिड और प्रोटीन के सस्ते स्रोत हैं, जो पशु चारा और उर्वरक के रूप में उपयोग किये जाने की उनकी क्षमता को रेखांकित करते हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी मुंबई (Mumbai) के कुलपति प्रोफेसर ए बी पंडित ने अपने छात्रों के साथ केराटिन अपशिष्ट को पालतू जानवरों के भोजन और पौधों के लिए उर्वरकों में बदलने की एक तकनीक विकसित की है. पेटेंट की जा चुकी यह नई तकनीक, आसानी से बड़े स्तर पर इस्तेमाल योग्य, पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा-दक्ष है, और यह अमीनो एसिड युक्त लिक्विड फर्टिलाइजर को वर्तमान में बाजार में मिल रहे उत्पादों की तुलना में अधिक किफायती बनाएगी. उन्होंने अपशिष्ट को बिक्री योग्य उर्वरकों और पशु आहार में बदलने के लिए उन्नत ऑक्सीकर (Sikar)ण का उपयोग किया. इसके पीछे की प्रमुख तकनीक में शुरुआती प्रक्रिया के बाद हाइड्रोडायनैमिक केविटेशन नाम की एक तकनीक के जरिये केराटिन का जल-अपघटन शामिल है, जिसमें बहते तरल में वाष्पीकरण, बबल फॉर्मेशन और बबल इम्प्लोशन का इस्तेमाल किया है.

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