Thursday , 21 October 2021

अर्न्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 राजस्थान के लिए विशेष: डॉ. राठौड़

उदयपुर (Udaipur). प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) द्वारा अंर्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 के परिप्रेक्ष्य में पोषण वाटिका महाअभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम 17 सितम्बर को आयोजित किया गया. इस देश व्यापी कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार, नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा किया गया. इस कार्यक्रम में भारत देश द्वारा पोषक अनाज प्रोत्साहन, पोषण वाटिका तथा वृक्षारोपण की पहल की आवश्यकता एवं आगामी योजना के बारे में आहवान् किया गया.

निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में किसानों, किसान महिलाओं, बालिकाओं, विधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़, कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) ने कहा कि भारत में पोषक अनाज (मिलेट्स) की विश्व व्यापी महत्ता के बारे में बांग्लादेश, केन्या, नेपाल, नाइजीरिया तथा रूस देशों में भारत के प्रस्ताव को सह-प्रस्तावित किया तथा विश्व के 70 देशों के सहयोग से ‘‘अंर्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023’’ के रूप में मनाने का समर्थन किया. उसी का परिणाम है कि खाद्य एवं कृषि संस्था संगठन रोम ने 17 सितंबर, 2021 को‘ अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023’ के पूरे विश्व में मनाने का समर्थन किया तथा भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली (New Delhi) ने आज 17 सितंबर, 2021 से इसकी पहल कर दी है.

इस अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्रों (उदयपुर (Udaipur)-द्वितीय, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ एवं भीलवाड़ा (Bhilwara) प्रथम एवं द्वितीय) पर कार्यक्रम आयोजित किए गये. जिसमें प्रसार शिक्षा निदेशालय, उदयपुर (Udaipur) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित किसान, किसान महिलाएं, बालिकाओं एवं अधिकारियों को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़, कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) ने बताया कि पोषक अनाज या मोटे अनाज के गुणों तथा महत्ता को विश्व पटल पर लाने का श्रेय हमारे देश को जाता है. हमारे देश के प्रयास से पूरे विश्व में वर्ष 2023 को ‘‘अंर्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष’’ में मनाया जायेगा, जिसकी विधिवत शुरुआत आज से हमारे देश में माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, नरेंद्र सिंह जी तोमर ने की. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली (New Delhi) तथा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किसान, महिलाएं एवं बालिकाओं में पोषक अनाज गुणवत्ता, नई उत्पादन तकनीकों, खाद्य प्रसंस्करण तथा उपयुक्त मार्केट के बारे में सजगता, ज्ञान एवं कौशल के विकास के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

डॉ. राठौड़ ने बताया कि भारत में वर्ष 2018 को ‘‘राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष’’ के रूप में मनाया जा चुका है क्योंकि भारत में 11.7 करोड़ छोटी जोत के खेत है जो भारत की कुल जोतों का लगभग 85 प्रतिशत भाग है. इन छोटी जोत के किसानों की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए पोषक अनाज या मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, कन्डुआ, सावा आदि का विशेष महत्व है.  भारत में आदि काल से ही पोषक अनाजों की खेती की जा रही है और यह सिद्ध हुआ है कि इन अनाजों के लिए भारत की जलवाय,ु वातावरण, कल्चर/रहन-सहन एवं पोषक वेल्यु अनुकूल है साथ ही उनहोंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं प्रसार वैज्ञानिकों से अनुरोध किया कि छोटे अनाजों वाली फसलों पर विशेष अनुसंधान किया जाये व इन फसलों की पुस्तिका तैयार कर किसानों का ज्ञानवर्धन किया जाए जिससे कि छोटे अनाज वाली फसलों की प्रति हेक्टर उपज में वृद्धि हो सके. 

मोटे अनाज, गेहूं एवं चावल की अपेक्षा अधिक पोषक कारी है चाहे वो प्रोटीन, रेशा, विटामिन या खनिज तत्व जैसे लोहा, मैग्नेशियम तथा कैल्शियम आदि रागी में सभी अनाजों की अपेक्षा सबसे ज्यादा कैल्शियम पाया जाता है. एनीमिया से ग्रसित महिलाओं एवं बच्चों के लिए पोषक अनाजों जैसे बाजरा का विशेष महत्व है. इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भी ज्यादा होते है. ग्लूटेन, प्रोटीन रहित तथा कम ग्लाइसेमिक सूचकांक के गुणों के कारण आज धनाढ्य लोगों में मोटे अनाज तथा इनके उत्पादों का उपयोग बढ़ गया है. अतः किसानों को पोषक अनाजों की उन्नत उत्पादन तकनीक अपनाकर अधिक उत्पादन लेना चाहिए तथा सही बाजार में बेचकर अधिक मुनाफा कमाना चाहिए.

डॉ. एस. के. शर्मा, निदेशक प्रसार शिक्षा एवं अनुसंधान ने बताया कि राजस्थान (Rajasthan) में पोषक अनाजों का विशेष महत्व है. बाजरा, ज्वार, सावा, प्रोसो, कन्डुआ आदि आज भी गांवों में सीमांत पर मंझले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण भोजन है. वैज्ञानिकों ने इन अनाजों को ‘स्मार्ट फसल’ के रूप में पहुंचाना है लेकिन हमारे देश के किसान जलवायु खतरों से निपटने में सक्षम, कम समय एवं कम पानी में पकने वाले पोषण युक्त इन अनाजों के गुणों से पहले से ही परिचित है. आज वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह साबित हो गया है कि अधिक तापमान की सहनशक्ति, कम कार्बन एवं पानी के पर्यावरणीय फुट प्रिंट की दृष्टि से ‘पोषक अनाज’ आज के समय में सबसे बेहतर विकल्प है. भारत जैसे देश जिसमें विश्व की 15 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है लेकिन विश्व के कुल पानी का केवल 4 प्रतिशत संसाधन हमारे पास है अतः मोटे अनाज का क्षेत्रफल, उनका मूल्य, इन फसलों का पीडीएस योजना में समावेश, मूल्य संवर्धन तथा उत्पादकों को अधिक आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर उचित नीति की आवश्यकता है. भारत ने इस दिशा में अनुसंधान, नई किस्में, बीज उपलब्धता तथा नई योजनाएं आदि कई नीतिगत परिवर्तन किए हैं.

इस कार्यक्रम में जुड़े प्रतिभागियों ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली (New Delhi) द्वारा ‘‘अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023‘‘ की पहल एवं शुभारंभ के अवसर पर ‘अंतरराष्ट्रीय मेगा सम्मेलन’ में माननीय केन्द्रीय कृषि किसान कल्याण मंत्री, नरेंद्र सिंह जी तोमर, कृषि राज्यमंत्री, माननीय कैलाश चौधरी तथा विभिन्न अतिथियों के उद्बोधनों को ऑनलाइन माध्यम से देखा.

कार्यक्रम के पहलु पोषाहार वाटिका एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत् ग्रामीण महिलाओं के पोषण सुधार हेतु महिलाओं को पोषण वाटिका हेतु बीज किट वितरित किये गए एवं प्रसार शिक्षा परिसर में माननीय कुलपति, निदेशक प्रसार एवं महिलाअेां द्वारा वृक्षारोपण किया गया.

कार्यक्रम की भूमिका एवं इसके महत्व पर डॉ. लतिका व्यास, प्रोफेसर, प्रसार शिक्षा निदेशालय ने प्रकाश डाला. इस कार्यक्रम में देश में पोषक अनाज के गुणों एवं आवश्यकता, पोषण वाटिका के प्रायोगिक पहलू तथा नर्सरी पौधरोपण विषय पर जानकारी दी गई. कार्यक्रम में सभी अतिथि एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद डॉ. राजीव बैराठी, प्रोफेसर, प्रसार शिक्षा निदेशालय उदयपुर (Udaipur) ने दिया. कार्यक्रम में लगभग 100 किसान, महिलाएं, बालिकाएं एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया.

 

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