Thursday , 28 January 2021

तमाम कोशिशों के बावजूद देश में सस्ता नहीं हो रहा खाने का तेल


विशेषज्ञों का अनुमान कम से कम मार्च तक तेल की कीमतें कम नहीं होने वालीं

नई दिल्ली (New Delhi) . कुछ समय से खाने के तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है. पिछले दिनों केंद्र सरकार (Central Government)ने तेल की कीमतें नीचे लाने के मकसद से ही पाम ऑयल पर 10 फीसदी तक आयात शुल्क भी कम कर दिया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद तेल की कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं और रसोई का बजट लगातार बिगड़ता ही जा रहा है. पिछले 5 महीने में खाने के तेल की कीमत करीब 40-50 फीसदी तक बढ़ गई है. सिर्फ पिछले एक महीने में ही खाने का तेल करीब 15 फीसदी तक महंगा हो गया है. सरसों के तेल की कीमत 40 फीसदी, सूरजमुखी के तेल की कीमत 52 फीसदी, सोयाबीन रिफाइंड ऑयल की कीमत 34 फीसदी, राइस ब्रेन रिफाइंड ऑयल 33 फीसदी और पाम रिफाइंड ऑयल की कीमत 37 फीसदी तक बढ़ गई हैं. सरसों का तेल फिलहाल 140-160 रुपये प्रति लीटर के करीब बिक रहा है.

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भारत दुनिया में पाम ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार है. इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के प्रेजिडेंट सुधाकर देसाई ने कहा कि इस कटौती ने पाम ऑयल को कम्पटीटिव बना दिया है क्योंकि अब रिफाइनर्स (Nurse) को सोयऑयल और सनफ्लावर ऑयल के मुकाबले 7.5 फीसदी कम टैक्स देना पड़ेगा. भारत में क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर 35 फीसदी आयात शुल्क लगता है. अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर कहते हैं कि भारत में तेल की मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से करीब 65 फीसदी तेल आयात किया जाता है. विदेशों में मौसम खराब होने की वजह से फसलें खराब हुई हैं, जिसके चलते वहां तेल की कीमतें अधिक हैं.

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लेटिन अमेरिका में सोयाबीन के उत्पादन पर असर पड़ा है, जबकि इंडोनेशिया में पाम ऑयल के उत्पादन पर असर पड़ा है. अर्जेंटीना में हड़ताल से भी तेल की कीमतें बढ़ी हैं. ऐसे में विदेशों से काफी महंगा तेल आ रहा है. अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के महामंत्री तरुण जैन का कहना है कि तेल पर से जीएसटी हटाने की मांग की गई है, ताकि कीमतें कम हो सकें. टैरिफ दरों को भी कम करने की मांग की गई है. ये भी मांग की गई है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए खाने के तेल पर सब्सिडी दी जाए. उनका कहना है कि अभी तेल की कीमतें मई-जून तक ऐसी ही बनी रहेंगी. विशेषज्ञों का भी मानना है कि कम से कम मार्च तक तेल की कीमतें कम नहीं होने वाली हैं.

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