भारत और फिर पाक जाएंगे रूस के विदेश मंत्री

नई दिल्ली (New Delhi) . भारत और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिहाज से रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इस यात्रा में रूस भारत से अपेक्षा करेगा कि वह एस 400 सहित हथियारों के सौदों को अमेरिकी दबाव से मुक्त रहकर लागू करे. क्वाड को लेकर रूस की चिंताओं पर भी बैठक में समझ बनाने की कोशिश जरूर होगी. दूसरी तरफ भारत पाकिस्तान औऱ चीन के संदर्भ में अपनी चिंता को भी परंपरागत मित्र देश से साझा कर सकता है. जानकारों का कहना है कि रूसी विदेश मंत्री भारत की यात्रा के बाद पाकिस्तान भी जाएंगे. इसलिए भारत आतंकवाद सहित तमाम मुद्दों पर दो टूक राय जरूर साझा करेगा.

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जानकारों का कहना है कि बीते कुछ समय मे काफी मिले-जुले घटनाक्रम हुए हैं. रूस ने पर्दे के पीछे से भारत और चीन के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई है. बेहद तनाव के वक्त ब्रिक्स और एससीओ जैसी बैठकों के आयोजन को बरकरार रखने में रूस की भूमिका अहम रही है. कोविड के दौर में चीन से तनाव के वक्त भारतीय मंत्रियो ने रूस का दौरा किया.

जहां चीनी मंत्री भी मौजूद रहे थे. क्वाड को लेकर रूस की चिंता जगजाहिर है. रूस क्वाड में अमेरिकी इंडो पैसिफिक अवधारणा के खिलाफ रहा है. वह इसे आक्रामक मानता है और उम्मीद करता है कि भारत अमेरिकी आक्रामकता में भागीदार नहीं होगा. चीन के खिलाफ मोर्चेबंदी और टकराव बढ़ने की कथित अमेरिकी नीति को लेकर रूसी विदेश मंत्री की ओर से बयान भी कुछ समय पहले आया था. एस 400 पर अमेरिकी दबाव भी रूस को नागवार लगता रहा है. उधर, पाकिस्तान से रूस की बढ़ती नजदीकी को लेकर भारत आशंकित रहा है. रूस और भारत में मतभेद की अटकलें उस वक्त शुरू हो गई थीं, जब दो दशक बाद पहली बार रूस और भारत के बीच होने वाली वार्षिक बैठक को पिछले साल टाल दिया गया था. क्वाड पर रूसी विदेश मंत्री के बयान के बाद हुए घटनाक्रम को लेकर कयासों का बाजार गर्म हुआ था.

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हालांकि दोनों देशों ने इसकी वजह कोविड 19 महामारी (Epidemic) को बताया था. वही दूसरी तरफ़ रूस और पाकिस्तान की बढ़ती क़रीबी की बात को लेकर भी कूटनीतिक गलियारों में अलग अलग मत रहे हैं. हाल के दिनों में रूस और पाकिस्तान के बीच क़रीबी बढ़ी है. उनके बीच साझा सैन्य अभ्यास भी हुए हैं. लेकिन, भारत मानता रहा है कि बहुपक्षीय कूटनीति में देश अपने हितों के मद्देनजर विभिन्न देशों से संबंध को लेकर स्वतंत्र है. इसका असर परस्पर हितों पर नहीं पड़ना चाहिए.

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