ग्रीन पीपल सोसायटी सदस्यों ने किया श्रमदान, सज्जनगढ़ अभयारण्य से लेन्टाना खरपतवार को हटाया

उदयपुर (Udaipur). राजस्थान (Rajasthan) में पर्यावरण संरक्षण के लिए नवगठित ग्रीन पीपल सोसाइटी के तत्वावधान में रविवार (Sunday) को सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में लेंटाना उन्मूलन के लिए श्रमदान किया गया. सोसायटी के अध्यक्ष व सेवानिवृत्त सीसीएफ राहुल भटनागर एवं डीएफओ अजीत ऊंचोई के निर्देशन में आज सुबह अभयारण्य परिसर में हानिकारक खरपतवार लेंटाना के उन्मूलन के लिए श्रमदान किया. अलसुबह ही ग्रीन पीपुल सोसाइटी के सभी सदस्य सज्जनगढ़ अभयारण्य पहुंचे. यहां उन्होंने जगह-जगह से हानिकारक खरपतवार को उखाड़ फेंका. सदस्यों ने एक विशेष यंत्र मंकी जैक का प्रयोग किया जिससे लेंटाना को जड़ समेत उखाड़ फैका गया.

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भटनागर ने बताया कि इसे उखाड़ना अत्यंत जरूरी है क्योंकि यह बहुत अधिक फैलता है और इसके अधिक फैलने से अन्य वनस्पतियां पनप नहीं पाती.सभी सदस्यों ने 2 घंटे से अधिक समय तक श्रमदान किया और इस लेंटाना को हटाया. डीएफओ उंचोई ने बताया कि लेंटाना के स्थान पर अब घास के बीज छिड़के जाएंगे ताकि यहां घास पनप सके और अभयारण्य के वन्यजीवों को भोजन मिल सके, साथ ही जैव विविधता का संतुलन बना रहे. इस मौके पर टीम के सदस्य सेवानिवृत्त डीएफओ बीएस राणा, पीएस चुंडावत, पर्यावरणविद डॉ सतीश शर्मा, पक्षी विशेषज्ञ विनय दवे, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संभागीय प्रतिनिधि अरुण सोनी एवं  महेंद्र जैन, शरद श्रीवास्तव इस्माइल, दुर्गा, कुशाल के साथ ही वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे.

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इसलिए जरूरी है लेंटाना का उन्मूलन:

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ.सतीश शर्मा ने बताया कि लेंटाना अमेरिका का मूल निवासी पौधा है. भारत में खरपतवार के रूप में प्रवेश कर गया है. यह अत्यधिक तेजी से बढ़ रहा है इससे वन्य क्षेत्र कटने लगे हैं.लेंटाना अत्यधिक बढ़ने से यह स्थानीय वनस्पति को जल भोजन एवं प्रकाश पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने देता इससे स्थानीय वनस्पति कम होने लगी है और स्थानीय वनस्पति के कम होने से शाकाहारी जब वन्यजीवों को भोजन मिलना बंद हो गया है या कम हो गया है. इससे शाकाहारी जीव फसलों की ओर बढ़ने लगे हैं और नुकसान पहुंचाने लगे और शाकाहारी जीवों के कम होने से मांसाहारी जीवों को भी भोजन कम हो गया है और मांसाहारी जीवन भी पालतू पशुओं पर आक्रमण करने लगे. इस प्रकार लेंटाना खाद्य श्रंखला एवं जैव विविधता को भरपूर रूप से प्रभावित कर रहा है तथा इसकों हटाना बहुत जरूरी है.  उन्होंने बताया कि अभी बारिश का मौसम होने कारण भूमि नम है अतः लेंटाना को जड़ से उखाड़ने का उपयुक्त समय अभी ही है.

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