असहाय एवं आश्रयहीन जरूरतमंदों को मिलेगा संबल ‘अपना घर आश्रम‘ का शुभारंभ

उदयपुर (Udaipur). असहाय एवं आश्रयहीन जरूरतमंदों के लिए ‘अपना घर आश्रम‘ का शुभारंभ 21 मार्च को शहर के आयड़ स्थित मीरा कॉलोनी में जय अम्बे मातृ संस्थान भवन में किया जाएगा. इस आश्रम के लिए एक सज्जन पुरूष एवं समाजसेवी दुर्गा प्रसाद नागदा ने अपना भवन समर्पित किया है.

अपना घर आश्रम के कॉर्डिनेटर शैलेन्द्र त्यागी ने बताया कि यह आश्रम ऐसे दीनजनों का घर है जिनका न कोई घर है न ठिकाना. जिनके लिए जीवन जीना नरक से भी बदतर हो चुका है, जो जीवन के अन्तिम पडा़व में प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक स्थल, बस स्टैण्ड, धार्मिक स्थलों, अस्पतालों के आस-पास तथा निर्जन स्थलों के पास मरणासन्न पड़े वेदनाओं के साथ अन्तिम कष्टों को झेल रहे होते हैं. इन दीनजनों के पास पीड़ा के समय में दर्द के लिए दवा, पेट के लिए भोजन व तन के लिए कपड़ा तो दूर की बात है, अन्तिम समय में पानी तक नसीब नहीं होता है. ऐसे लोगों को यहां लाकर उनकी सेवा की जाएगी.

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वर्तमान में अपना घर आश्रम उदयपुर (Udaipur) की आवासीय क्षमता 25 बैड की है. इस आश्रम में आवश्यक रूप से असहाय आश्रयहीन बीमार मानसिक एवं आस-पास के क्षेत्रों से लाकर भर्ती किया जायेगा. आश्रम में प्रभुजनों की संख्या अधिक होने पर भरतपुर (Bharatpur) अपना घर आश्रम से स्थानान्तरित किया जाता है. यह सम्पूर्ण आश्रम जनसहयोग से संचालित किया जा रहा है. आश्रम में भर्ती होने वाले प्रभुजनों को निःशुल्क भोजन, चिकित्सा, वस्त्र, आवास एवं अन्य आवश्कताओं की पूर्ति कर ममतामयी सेवाऐं उपलब्ध कराई जाती हैं. स्वास्थ्य लाभ होने के उपरान्त इन प्रभजनों को उनके परिवारोें को खोज कर पुनर्वासित करने का प्रयास किया जाता है.

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संस्था की विचारधारा

उन्होंने बताया कि इन पीडितों की सेवा ही हमारी पूजा व आराधना है. वर्तमान में संस्था द्वारा देश के 8 प्रदेशों में कुल 38 आश्रम संचालित हैं तथा एक आश्रम नेपाल में भक्तपुर (काठमाण्डू) में संचालित है इन सभी आश्रमों में 6500 से अधिक प्रभस्वरूप पुरुष, माता-बहनें एवं बाल गोपाल भर्ती हैं. संस्था द्वारा संचालित भरतपुर (Bharatpur) आश्रम अपनी श्रेणी का देश का सबसे बड़ा आश्रम है जहां इस समय 3200 से अधिक प्रभुस्वरूप पीडि़त भर्ती हैं. इस आश्रम में दुर्घटना ग्रस्त घायल, बीमार गोमाता, स्वान, बिल्ली, मोर, कबूतर एवं अन्य वन्य जीवों तथा पक्षियों को आवास, भोजन, सेवा एवं उपचार की व्यवस्था है, जिसमें वर्तमान में 250 से अधिक पीडि़त जीव सेवाऐं ले रहें हैं.

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