Thursday , 28 January 2021

सुविवि विधि विद्यार्थियों की फीस डिसकाउंट पर उच्च न्यायालय ने किया मुख्य सचिव-रजिस्‍ट्रार से जवाब तलब किया


उदयपुर (Udaipur). मोहनलाल सुखाडिया विवि के विधि महाविद्वालय के बीएएलएलबी पंच र्वाीय कोर्स के छात्र (student) छात्राओं द्वारा विवि पर गैर न्यायसंगत वसूले जा रहे फीस को लेकर लगाई गई एक सिविल रिट प्रकरण में सोमवार (Monday) को सुनवाई करते हुए जस्टिस विजय बिश्नोई ने राज्य सरकार (State government) जरिए मुख्य सचिव एव मोसुविवि जरिए रजिस्टार से जवाब तलब किया है मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी होगी.

याचिकाकर्ताओं ने सिद्वार्थ पिल्लई व अन्य बनाम राज्य सरकार (State government) प्रकरण में कोरोना काल के दौरान कॉलेज में क्लासरूम शिक्षण मार्च महीने से निलंबित रहने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों से सामान्य शिक्षण व्यवस्था अनुरूप फीस वसूले जाने की व्यथा जाहिर की याचिका में न्यायालय से गुहार लगाई गई कि विवि को आदेशित किया जाए कि वो विद्यार्थियों द्वारा नहीं ली गई सुविधाओं का शुल्क नहीं लेवें एवं केवल डिसकाउंटेड टयूशन फीस ही लिया जाए.

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याचिकाकताओं के अधिवक्ता सज्जनसिंह राठौड ने माननीय न्यायलय को बताया कि अकादमिक स़त्र 2019-2020 समाप्ति के बाद के ही महामारी (Epidemic) के प्रकोप को रोकने के लिए राज्य में सभी शिक्षण संस्थानों में फिजिकली शिक्षण कार्य स्थगित कर दिए गए याचिकाकर्ता तब से ही आनलाईन टीचिंग तकनीक से पढाई कर रहे हैं
अगस्त सितंबर में नया अकादमिक स़त्र प्रारंभ होने पर विवि द्वारा विद्यार्थियों से पूरी फीस ली गई जबकि फिजिकल उपस्थिति नही होने के वे विवि व महाविद्यालय की किसी भी अन्य सुविधाओं का उपयोग नहीं कर रहे हैं.

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विवि द्वारा विभिन्न मदों जैसे साइकिल स्टैंड, लाइब्रेरी, रीडिंग रूम, ई जरनल, मूट कोर्ट, लीगल एड केंप, एक्सटेंश्न लेक्चर, मनोरंजन, सांस्कतिक कार्यक्रम सहित अन्य मदों में पफीस वसूला गया एवं परीक्षा फार्म भरने पर भी ई सुविधा के नाम से प्रत्येक विद्यार्थी से 250 रूपए वसूले गए याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जिन सुविधाओं व सेवाओं का विद्यार्थियों द्वारा उपयोग नहीं किया गया है उस मद में पफीस वसूल करना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत विद्यार्थियों के मूल अधिकार का हनन है.

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