Thursday , 25 February 2021

मैंने भी असफलता से टूट कर खुदकुशी करने की सोच बैठा था, पर दोस्तों की सतर्कता ने बचा लिया : मनोज वाजपेयी

मुंबई (Mumbai) . सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से बॉलीवुड (Bollywood) और टीवी इंडस्ट्री के कई लोग अपनी परेशानी खुलकर कहने लगे हैं. डिप्रेशन से लेकर सुसाइड तक आए मन के ख्यालों को लोग साझा कर रहे हैं. हाल ही में नेशनल अवार्ड विनर एक्टर मनोज बाजपेयी ने एक चौकाने वाला खुलासा किया और बताया कि कैसे स्ट्रगल के शुरुआती दिनों में वह खुद से ही हार गए थे और उनके मन भी खुद को खत्म करने का विचार आ रहा था, लेकिन उनके दोस्तों ने उनकी जान बचा ली.

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद फिल्म इंडस्ट्री में सेलेब्स अब डिप्रेशन को लेकर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं. हाल ही में मनोज बाजपेयी ने अपने स्ट्रगल के शुरुआती दिनों में सामने आई परेशानियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी, उन्होंने बताया कि वह उन दिनों आत्महत्या (Murder) करने के काफी करीब थे, और उन्हें वड़ा पाव भी काफी महंगा लगता था. चॉल का किराया भी बड़ी मुश्किल से भर पाते थे और एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने उनका फोटो फाड़ दिया था.

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हिंदी सिनेमा के सबसे शानदार एक्टर्स में से एक बॉलीवुड (Bollywood) एक्टर मनोज बाजपेयी सुशांत के निधन के बाद से गमगीन हैं. सोशल मीडिया (Media) पर उन्होंने सुशांत के जाने का दुख जताया था. हाल ही में मनोज बाजपेयी ने अपने स्ट्रगल के शुरुआती दिनों की कहानी को साझा किया और उन दिनों आने वाली परेशनियों को लेकर खुलकर बातें कीं. उन्होंने बताया कि वह उन दिनों आत्महत्या (Murder) करने के काफी करीब थे.
मनोज ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत थिएटर से की और 3 बार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के लिए भी अप्लाई किया लेकिन कुछ हाथ न लग सका. ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि मैंने थिएटर किया, जिसके बारे में मेरे परिवार को आइडिया नहीं था. आखिर में मैंने अपने पिता को एक लेटर लिखा, जिससे वह काफी नाराज हो गए. वह मुझे 200 रुपए भेजा करते थे, गुस्सा होने के बाद उन्होंने वह भी नहीं भेजे. परिवार सोचता था कि मैं किसी काम का नहीं. मैं एक्टिंग में करियर बनाना चाहता था, लेकिन मैं एक आउटसाइडर था. मैं बीच में फिट होने की कोशिश में लगा हुआ था.

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मनोज बाजपेयी ने आगे बताया कि मैंने हिंदी-इंग्लिश बोलनी सीखी और भोजपुरी तो मेरी भाषा थी तो इस पर मेरी अच्छी पकड़ थी. इसके बाद मैंने एनएसडी के लिए ट्राई किया लेकिन तीन बार रिजेक्ट हुआ. मैं सुसाइड करने की सोच रहा था, ऐसे में मेरे दोस्तों ने मेरा बहुत साथ दिया. वह मेरे बराबर में सोने लगे और देखते कि मैं ठीक तो हूं. जब तक मुझे इस इंडस्ट्री ने अपना नहीं लिया सभी मेरे साथ रहे. मनोज बाजपेयी ने आगे कहा कि मुझे मेरे पहले शॉट के बाद ‘निकल जाओ’ तक कह दिया गया था. क्योकि मैं एक आइडियल हीरो फेस नहीं था. सभी ये सोचते थे कि मैं बड़ी स्क्रीन पर दिखने के लायक नहीं क्योंकि मेरा चेहरा हीरो वाला नहीं.

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उन्होंने बताया कि स्ट्रगल के दिनों में घर का किराया देने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हुआ करते थे और उस समय वडापाव भी बहुत महंगा लगता था लेकिन, मेरे अंदर सफल होने की भूख थी. महेश भट्ट की टीवी सीरीज में पहली बार काम मिला. एक एपिसोड के 1500 रुपए मिला करते थे, वह मेरी पहली कमाई थी. मेरे काम को पहचाना गया और इसके बाद मुझे बॉलीवुड (Bollywood) में पहली फिल्म मिली, सत्या. सत्या के बाद उन्हें बॉलीवुड (Bollywood) में स्वीकार कर लिया गया. इसके बाद उनकी अलीगढ़ (Aligarh), राजनीति, सत्याग्रह, गैंग्स ऑफ वासेपुर समेत कई फिल्में आईं. उन्होंने अभिषेक चौबे की फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में सुशांत सिंह राजपूत के साथ आखिरी बार काम किया था.

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