म्यांमार में सत्ता के मद में चूर सेना ने सड़कों पर बिछा दीं 169 लाशें

नई दिल्ली (New Delhi) . पड़ोसी देश म्यांमार में ‘आर्म्ड फोर्सेज डे’ पर सत्ता के मद में चूर सेना ने सड़कों पर शांति से प्रदर्शनकर रहे लोगों के साथ खूनी होली खेल 169 लाशें बिछा दीं. पिछले महीने से ही सैन्य तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे सैंकड़ों लोगों को मारा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, आर्म्ड फोर्सेड डे के दिन 50 शहरों और कस्बों में प्रोटेस्ट कर रहे 169 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार, आर्म्ड फोर्सेज डे के मौके पर सेना की चेतावनी के बावजूद सड़कों पर कई प्रदर्शनकारियों (Protesters) उतरे थे. इन प्रदर्शनकारियों (Protesters) पर गोलियां बरसाने के बाद सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग और उनके जनरलों ने रात में भव्य पार्टी भी की.

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कई रिपोर्ट्स में ये भी सामने आया है कि जब प्रदर्शनकारियों (Protesters) का अंतिम संस्कार किया जा रहा था तो सेना ने उसमें भी दखल देने की कोशिश की और सेना ने ओपन फायरिंग के साथ ही ग्रेनेड्स भी फेंके थे. हालांकि इस दौरान किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. वही सेना के हिंसक एक्शन के बावजूद म्यांमार में प्रदर्शनकारियों (Protesters) का विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला थमा नहीं है.

म्यांमार में मारे जाने वाले लोगों में एक 20 साल की नर्स (Nurse) भी शामिल है जो रेस्क्यू टीम के साथ काम कर रही थी. इसके अलावा एक फुटबॉलर, डॉक्टर, महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली एक्टिविस्ट, एक बैंक (Bank) कर्मचारी, हड़ताल पर चल रहा एक पुलिस (Police)वाला और एक टूर गाइड जैसे कई लोग हैं जिनके मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.
थिनजार हेन नाम की इस नर्स (Nurse) को सिर में गोली मारी गई थी. वो उस दौरान मोन्यवा शहर में बाकी घायल प्रदर्शनकारियों (Protesters) की मदद कर रही थीं. थिनजार की एक फुटेज भी वायरल हो रही है जिसमें वे मोन्यवा के लोगों के सामने स्पीच दे रही थीं और सरकारी कर्मचारियों को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए रिक्वेस्ट कर रही थीं.इसके अलावा 21 साल के पुलिस (Police) अफसर चीट लिन भी प्रोटेस्ट में शामिल थे. 4 मार्च को लिन को शूट टू किल के ऑर्डर मिले थे लेकिन लिन ने ये कहकर अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था कि इन प्रदर्शनों में उसका भाई भी शामिल हो सकता है.

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एक बातचीत में इस पुलिस (Police) अफसर ने कहा था कि ‘मेरा भाई इन प्रदर्शनों में शामिल हो सकता है. इन लोगों ने कुछ भी गलत नहीं किया है और मैं बेगुनाहों पर गोलियां नहीं चला सकता हूं.’ लिन नौकरी छोड़ने के बाद इन प्रदर्शनों में शामिल हुए थे और शनिवार (Saturday) को सेना के हिंसक एक्शन में उनकी भी मौत हो चुकी है.

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