सांसदों की बैठक में सांसद कटारा ने उठाया डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना का मुद्दा


नई दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर लोकसभा परिसर में केन्द्रीय रेल मंत्री पीयेष गोयल के साथ हुई सांसदों की बैठक में सांसद कनकमल कटारा ने बीते वर्षों से अटकी डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना का मुद्दा एक बार फिर से केंद्र सरकार के समक्ष उठाया.

कटारा ने डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल राजस्थान के इस दक्षिणांचल में बांसवाड़ा एक मात्र ऐसा जिला है जिसके किसी भी कोने से रेल नहीं गुजरती. जबकि गुजरात एवं मध्यप्रदेश को राजस्थान से जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण केन्द्र हैं. यहाँ माही बजाज सागर जैसी अंतर्राज्यीय बहु उद्देशीय सिंचाई एवं विद्युत परियोजना के मौजूद होने के साथ ही आणविक बिजली परियोजना भी प्रस्तावित है. बाँसवाड़ा डूंगरपुर कपड़ा मिलों का हब होने के साथ ही यहाँ मार्बल पत्थर और अन्य खनिज भण्डार भी हैं.

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यह रेल लाइन बनने से इस आदिवासी इलाके के लोगों को रोज़गार मिलने के साथ ही वाणिज्यिक उत्पादों के परिवहन की सुविधा से रेलवे को राजस्व आमदानी होगी और पूरा मध्य भारत गुजरात और पूरे देश से जुड़ जायेगा. भारतीय सेना के आयुधों के परिवहन की दृष्टि से भी यह सुरक्षित रेल लाइन होगी. साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी अंचल की जीवनरेखा साबित हो सकती है. राज्य सरकार यदि अपना अंशदान नहीं दें तो भी केन्द्र सरकार को इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए पूरा खर्चा वहन करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिएँ.

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गौरतलब है कि वर्ष 2010-11 के रेल बजट में डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना की घोषणा हुई थी. केंद्र व राज्य सरकार के साझे में बनने वाली यह देश की पहली परियोजना थी. 3 जून, 2011 को डूंगरपुर मे परियोजना का शिलान्यास हुआ था. प्रोजेक्ट को 2016 तक पूरा करना था, लेकिन परियोजना की गति पहले मंद हुई और फिर ठप ही हो गई.

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उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा सरकार की ओर से जमीनों के मुआवजे की राशि का बजट जारी नहीं होने और इससे काम आगे नहीं बढ़ पाने के कारण बांसवाड़ा, डूंगरपुर और रतलाम जिलों में उप मुख्य अभियंता (निर्माण) कार्यालय भी बंद कर दिए हैं. सांसद कटारा ने उदयपुर डूंगरपुर हिम्मतनगर गुजरात ब्रॉडगेज रेल लाइन के काम की गति को और तेज करने की माँग भी रखी. बैठक में राजस्थान की अन्य रेल परियोजनाओं के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सांसदों की माँगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का भरोसा दिया. बैठक में प्रदेश के चौबीस सांसद मौजूद थे.

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