भारत-चीन बोले- पैंगोंग झील के बाद देपसांग में खुलेगा सैनिकों की वापसी का रास्ता

नई दिल्ली (New Delhi) . वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गतिरोध के बीच भारत और चीन ने 10वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान में कहा कि पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच बनी सहमति, अपना संवाद और संपर्क जारी रखने, जमीन पर स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने तथा शेष मुद्दों का संतुलित और व्यवस्थित तरीके से समाधान करने पर भी सहमत हुए.

  हम अर्थव्यवस्था को बंद नहीं करेंगे, हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करने की बजाय सुरक्षा देना - अमरिंदर सिंह

यह बयान दोनों देशों के बीच कोर कमांडर लेवल की 16 घंटे तक चली दसवें दौर की वार्ता के बाद आया है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ मोल्दो बिंदु क्षेत्र में शनिवार (Saturday) को सुबह दस बजे शुरू हुई थी और रात दो बजे तक चली. बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया सुगमता से पूरी होने के बारे में सकारात्मक रूप से अवगत कराया और उल्लेख किया कि यह पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.’ दोनों देशों के बीच पिछले साल पांच मई को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और फिर हर रोज बदलते घटनाक्रम में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी. गतिरोध के करीब पांच महीने बाद भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर क्षेत्र में मुखपारी, रेचिल ला और मगर हिल क्षेत्रों में सामरिक महत्व की कई पर्वत चोटियों पर कब्जा कर लिया था.

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