भारत को बड़े पैमाने पर कोरोना टीकों का उत्पादन बढ़ाना होगा

नई दिल्ली (New Delhi) . अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रमुख डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत को टीकाकरण लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर कोरोना टीकों का उत्पादन बढ़ाना होगा. उन्होंने वैक्सीन का स्टॉक विदेशों से खरीदने के लिए एक व्यापक रणनीति की जरूरत बताई. गुलेरिया ने एक समाचार चैनल से से बातचीत में कहा कि भारत में जुलाई के अंत तक प्रतिदिन 1 करोड़ लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य है, इसके लिए भारत को उत्पादन बढ़ाने और विदेशों से अधिक से अधिक टीके प्राप्त करने की आवश्यकता है.

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उन्होंने कई प्राधिकरणों के बजाय एकल प्राधिकरण से निपटने के लिए निर्माताओं की प्राथमिकता का हवाला देते हुए, टीके की खरीद के लिए एक ‘समग्र समाधान’ की आवश्यकता पर जोर दिया. एम्स प्रमुख की टिप्पणी कई वैश्विक दवा निर्माताओं द्वारा दिल्ली और पंजाब (Punjab) जैसी विभिन्न राज्य सरकारों की मांगों को पूरा करने से इनकार करने के संदर्भ में आई है. उन्होंने केवल भारत की केंद्र सरकार (Central Government)के साथ बातचीत करने की अपनी नीति का हवाला दिया है. हाल ही में शुरू की गई केंद्र की कोविड वैक्सीन नीति के बाद राज्य सरकारों को निजी खिलाड़ियों की मदद लेने की आवश्यकता पड़ी. जिसके तहत कंपनियों को निजी अस्पतालों और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के साथ अपने स्वयं के आपूर्ति अनुबंध तय करने की अनुमति दी गई थी.

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गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण अभियान पर डॉ गुलेरिया ने कहा, “गर्भवती महिलाओं में रोग की संभावना और मृत्यु दर अधिक होती है, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द टीका लगवाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि वैश्विक आंकड़ों के अनुसार गर्भवती महिलाओं पर टीकों के लाभ उनके नकारात्मक प्रभावों से कहीं अधिक हैं. उन्होंने कहा, “कोवैक्सिन एक निष्क्रिय वायरस वैक्सीन है जो फ्लू के टीके के समान है, इस प्रकार यह गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित होना चाहिए.”

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मल्टीविटामिन और जिंक सप्लीमेंट जैसे इम्युनिटी बूस्टर के उपयोग पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए, एम्स प्रमुख ने कहा कि वे कोई नुकसान नहीं करते हैं, फिर भी उन्हें विस्तारित अवधि के लिए नहीं लिया जाना चाहिए. इसके बजाय, उन्होंने लोगों को स्वस्थ खाने और इन आहार घटकों को प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त करने की सलाह दी.

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