Wednesday , 15 August 2018
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गेटवे ऑफ इंडिया का नाम बदलकर ’भारत द्वार’ करने की मांग

मुंबई, 13 अगस्त (उदयपुर किरण). राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन में शामिल हिंदुवादी संगठनों ने गेटवे ऑफ इंडिया का नाम बदलकर भारत द्वार करने की मांग की है. उनका कहना है कि भारत में प्रवेश करने के लिए वर्ष 1911 में जॉर्ज पंचम और रानी मेरी इन के हाथों से मुंबई के कुलाबा क्षेत्र में ‘गेट वे ऑफ इंडिया’ का भूमिपूजन किया गया. वर्ष 1924 में उसका निर्माण पूरा होने पर उसका उपयोग तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय और मुंबई के गवर्नर के स्वागत के लिए किया जाने लगा. भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद इस नाम को बदल उसे भारतीय नाम देना अपेक्षित था. लेकिन आज भी मुंबई की सम्मानित वास्तु पर विदेशी आक्रामकों का नाम चमक रहा है. बाकी राष्ट्रों ने विदेशी आक्रामकों से छुटकारा मिलने पर पुराने नाम तुरंत बदले. जैसे ‘सिलोन’ का ‘श्रीलंका’ हुआ.

जपान, चीन, रूस, फ्रान्स यहां के अधिकांश सभी गांव, रास्ते, प्रमुख चौक इन्हें उनकी ही परिभाषा में नाम है और वहां की जनता और जनप्रतिनिधियों को उसका अभिमान है. इसलिए भारत सरकार को भी ‘गेट वे ऑफ इंडिया’ का नाम बदलकर ‘भारत द्वार’ करना चाहिए, ऐसी मांग राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन में की है. इसके अन्य कई मांगें आंदोलन में की गई. उनकी मांग है कि ‘बकरीद’ के दिन होनेवाली गोहत्या रोखने के लिए प्रशासन को सचेत रहना चाहिए. जगह जगह पर ध्यान देने के लिए पुलिस दल को तैनात किया जाए. सरकार के आदेश अनुसार सरकारी कसाई खानों के अलावा बाकी कोई भी जगहों पर प्राणियों का वध नहीं किया जा सकता. इसलिए ’बकरीद’ के मौके पर अस्थायी रूप से कसाईखाने खड़े करने के लिए अनुमति न दी जाए. इन संगठनों का कहना है कि सलमान खान निर्मित फिल्म ’लवरात्री’ का नाम जान-बूझकर हिन्दुओं के ‘नवरात्री’ उत्सव से मिलता-जुलता रखा गया है. ताकि हिन्दू उसका विरोध करें और उससे विवाद बनाकर फिल्म का धंधा अधिक चल सके.

’लवरात्री’ फिल्म के ट्रेलर में भी ‘उसे पटाने के लिए तुम्हारे पास 9 दिन और 9 राते हैं’. ऐसे वार्तालाप होने से ’हिन्दुओं के धार्मिक उत्सव प्यार के मामलों के लिए ही होते हैं’, ऐसा गलत संदेश इससे जा रहा है. इसलिए इस फिल्म का नाम तुरंत बदला जाना चाहिए. उत्तरप्रदेश के देवरिया के सरकारी पाठशाला का नाम बदल कर ‘इस्लामिया प्राइमरी स्कूल’ किया गया. बाकी 4 पाठशालाओं को शुक्रवार को छुट्टी की घोषणा की गई है. यह भारत का धीरे धीरे ‘इस्लामीकरण’ करने के षड्यंत्र का भाग है. इसलिए सरकार को देश के सभी पाठशालाओं की इस दृष्टि से पूछताछ करनी चाहिए और भारत का ’इस्लामीकरण’ रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए. यह मांगे भी आंदोलन में की गई.

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