हाइड्रोजन बिजनेस में हिस्सेदारी बेचना चाहती है इंडियन आइल: रिपोर्ट

नई दिल्ली (New Delhi) . इंडियन ऑयल अब अपने हाइड्रोजन प्रोड्यूसिंग फैसिलिटी के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इस बारे में जानकारी रखने वाले कुछ लोगों ने यह बताया है. देश की यह सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी सबसे ज्यादा हाइड्रोजन का भी उत्पादन करती है. लेकिन, अब यह कंपनी अपने हाइड्रोजन प्रोड्यूसिंग यूनिट्स और सल्फर रिकवरी फैसिलिटी को अपने रिफाइनरीज से अलग करना चाहती है. इनकी एक अलग ईकाई बनाई जाएगी. नई ईकाई की कुछ हिस्सेदारी को एक या इससे अधिक प्राइवेट कंपनियों को बेचा जाएगा.

कंपनी ने इसके लिए केंद्र सरकार (Central Government)को एक प्रस्ताव भेजा है. दरअसल, केंद्र सरकार (Central Government)इंडियन ऑयल, गेल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के ऑयल व गैस पाइपलाइन में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थी, जिसके बाद हाइड्रोजेन बनाने वाली फैसिलिटी को मोनेटाइज करने पर विचार किया जा रहा है. इंडियन ऑयल अपने पाइपाइन्स में हिस्सेदारी बेचने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. यही कारण है कि वो हाइड्रोजेन फैसिलिटी के जरिए फंड जुटाने पर विचार कर रहा है. केंद्र सरकार (Central Government)इंडियन ऑयल, गेल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पाइपलाइन्स में हिस्सेदारी बेचकर 17,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.

इंडियन ऑयल के अधिकारियों का मानना है कि हाइड्रोजन उत्पादन फैसिलिटी को मोनेटाइज करके 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं. आमतौर पर रिफाइनरिंग के पास सुविधा होती है कि वे बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन का उत्पादन करें. वे इसका उपयोग इंटरमीडिएट ऑयल प्रोडक्ट्स के लिए करती हैं. साथ ही उत्सर्जन मानक को पूरा करने के लिए रिफाइन किए जा चुके ईंधन से हाइड्रोजन के जरिए ही सल्फर निकाला जाता है. इंडियन ऑयल प्राकृतिक गैस और नैफ्था की मदद से हाइड्रोजन तैयार करता है. इंडियन ऑयल के पास हर साल 7,20,000 मिलियन टन हाइड्रोजन उत्पादन करने की क्षमता है. केंद्र सरकार (Central Government)ने एक नेशनल हाइड्रोजन मिशन का ऐलान किया है. इंडियन ऑयल भी अब ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है. यह कंपनी भविष्य में रिटेल हाइड्रोजन नेटवर्क तैयार करने पर भी काम कर रही है.

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