देश की पहली महिला क्रिकेट कमेंटेटर चंद्रा नायडू नहीं रहीं


इन्दौर (Indore) . भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान कर्नल सी. के. नायडू की पुत्री और देश की पहली महिला क्रिकेट कमेंटेटर चंद्रा नायडू का रविवार (Sunday) को निधन हो गया. 88 वर्षीय चंद्रा नायडू ने यहां मनोरमागंज स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली. वह अविवाहित थीं और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं, जिसके कारण चल-फिर नहीं पाती थीं. घरेलू सहायिका उनकी देखभाल कर रही थीं.

क्रिकेट के जानकारों के मुताबिक चंद्रा नायडू 1950-60 के दशक में क्रिकेट खेला करती थीं और उन्होंने मध्य प्रदेश में महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने में बहुत मेहनत की थी. उस दौर में लड़कियां क्रिकेट में बहुत कम ही नजर आती थीं और उस समय टी-शर्ट और ट्राउजर में नहीं, बल्कि सलवार कमीज पहनकर महिला खिलाड़ियों के खेलने का प्रचलन था. चंद्रा नायडू भारत की शुरूआती महिला कमेंटेटरों में से एक थीं. उन्होंने नेशनल चैंपियंस बॉम्बे और एमसीसी की टीमों के बीच इन्दौर (Indore) में वर्ष 1977 में खेले गए क्रिकेट मैच में पहली बार कमेंट्री की थी.

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हालांकि, चंद्रा नायडू क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में पेशेवर तौर पर लंबे समय तक सक्रिय नहीं रही थीं. चंद्रा नायडू वर्ष 1982 में लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए स्वर्ण जयंती टेस्ट मैच की गवाह बनी थी. वहां उन्होंने लॉर्ड्स कमेटी रूम में एक कार्यक्रम को संबोधित भी किया था. उन्होंने अपने पिता के जीवन पर ‘सीके नायडू : ए डॉटर रिमेम्बर्स’ नाम की पुस्तक लिखी थी.

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अंग्रेजी की प्रोफेसर ने हिंदी कमेंट्री में कमाया नाम

चंद्रा नायडू इन्दौर (Indore) के शासकीय कन्या महाविद्यालय से अंग्रेजी की प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुई थीं. अंग्रेजी की प्रोफेसर होने के बावजूद हिंदी भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ थी. हिंदी कमेंटेटर के रूप में जाने-जाने वाले पद्म सुशील दोषी को भी उन्होंने बतौर कमेंटेटर प्रोत्साहित किया. सुशील दोषी ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली कमेंट्री नेहरू स्टेडियम में मेरे साथ ही की थी. दोषी ने बताया कि जब मैं पहली बार 1977-78 में ऑस्ट्रेलिया कमेंट्री करने गया तो उन्होंने मुझे पत्र लिखकर मेरा हौसला बढ़ाया था. कर्नल सीके नायडू कहा करते थे कि चंद्रा मेरी बेटी नहीं बेटा है. उसमें भी आत्मसम्मान की भावना और संघर्ष की क्षमता है.

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बीसीसीआई के पूर्व सचिव संजय जगदाले ने चंद्रा नायडू के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वह देश के महिला जगत में क्रिकेट कमेंट्री की पुरोधा थीं और उन्होंने मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने में भी योगदान किया था. उन्होंने कहा, ‘मुझे याद है कि अलग-अलग शहरों में आयोजित मैचों के लिए चंद्रा नायडू राज्य की महिला क्रिकेट टीमों के साथ प्रबंधक तथा अन्य भूमिकाओं में जाती थीं और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाती थीं.

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