Thursday , 25 February 2021

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंता, 14वें दलाई लामा की मौत बन सकती हैं एशिया में धार्मिक संकट का कारण

ताइपे . दलाई लामा को 90 साल के होने में केवल कुछ साल बचे हैं. इस बीच अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आशंका है कि उनकी मृत्यु एशिया में धार्मिक संकट को जन्म दे सकती है. 14वें दलाई लामा 85 वर्षीय तेनजिन ग्यात्सो ने कुछ साल पहले घोषणा की थी कि 90 साल की उम्र में तय करुंगा कि उनका अगला अवतार होना चाहिए या नहीं. मीडिया (Media) रिपोर्ट के अनुसार दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो अभी भी अच्छे स्वास्थ्य में हैं और उनकी उत्तराधिकार पर सवाल बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 साल पहले दलाई लामा ने ऐलान किया था कि 90 साल का होने पर वह इस बात का फैसला करुंगा कि उनका अगला अवतार होगा या नहीं.

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इसके साथ ही इसकी आशंका भी दिखने लगी है, कि कहीं उनके निधन से एशिया में धार्मिक संकट न पैदा हो जाए. आखिर वह अब सिर्फ धार्मिक हस्ती नहीं, कम से कम चीन के लिए राजनीतिक मुसीबत बन चुके हैं. साल 1959 में चीन के खिलाफ तिब्बत में असफल आंदोलन छेड़ने वाले दलाई लामा भारत आ गए थे और यहां धर्मशाला में निर्वासित सरकार बनाई थी. उनके पीछे हजारों तिब्बती लोग भी आए. वह फिर कभी तिब्बत नहीं लौटे. पेइचिंग उन्हें अलगाववादी कहता है और अगले दलाई लामा का चुनाव खुद करना चाहता है. दलाई लामा अगले उत्तराधिकारी के भारतीय होने से लेकर महिला होने तक की संभावनाएं जता चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वक्त में दो अलग-अलग दलाई लामा भी देखने को मिल सकते हैं.

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दूसरी ओर, चीनी सरकार ने साफ किया है कि अगले दलाई लामा तिब्बत से होंगे और पेइचिंग के मुताबिक बनाए जाएंगे. यहां तक कि चीनी सरकार ने दस्तावेज जारी कर पुनर्जन्म के प्रबंधन का तरीका तक बता दिया था. इसमें यह लिखा गया था कि तिब्बत की राजनीतिक हस्तियों का पुनर्जन्म चीनी सरकार की मंजूरी पर होगा और जिनका प्रभाव ज्यादा होगा, उन्हें स्टेट काउंसिल से इजाजत लेनी होगी. सेतेन का कहना है कि चीन धार्मिक हस्तियों को खोजने, टेस्ट करने, पहचाने, शिक्षित करने और ट्रेन करने के लिए नियंत्रण रखता है. यहां तक कि उसने कई सीनियर लामा अपने गुट में कर रखे हैं जो समय आने पर उसका साथ दें. स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

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धर्मशाला के तिब्बत पॉलिसी इंस्टिट्यूट के रिसर्च फेलो तेनजिन सेतेन का कहना है कि तिब्बत के लोगों और उनकी पहचान और राष्ट्रीयता के लिए दलाई लामा एक अहम प्रतीक हैं. ये लोग चीन के बनाए दलाई लामा को स्वीकार नहीं करने वाले है. मौजूदा दलाई लामा के तिब्बत लौटने से पहले अगर उनका निधन होता है,तब क्या होगा, इसे लेकर कोई नियम नहीं है.

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