हक़ीक़त / क्या चीनी -भारतीय सैनिक वापिस लौट रहे हैं ?

(लेखक-डॉ अरविन्द प्रेमचंद जैन / )
सैनिक गए नहीं थे पर वापिस लौट रहे हैं
कभी कभी बहुत सी चीज़ों में रहस्य छुपा रहता हैं.जैसे किसी से पूछो आपने झूठ बोलना बंद कर दिया ?इसका उत्तर क्या हो सकता हैं ?ऐसी ही स्थिति भारत और चीन की हैं.यानी दोनों देशों में युध्य नहीं हुआ यानी कोई किसी की सीमा में नहीं गया,कोई के कोई सैनिक नहीं मरे तब इसका क्या नाम होगा ?यदि सैनिक वापिस लौट रहे यानी दोनों तरफ से अतिक्रमण किया गया होगा तभी तो अपनी अपनी पुरानी स्थिति में आ रहे हैं,पर इस समय दोनों सरकारें कहने को तैयार नहीं हैं की युध्य हुआ था,अतिक्रमण किया गया और कोई सैनिक नहीं मरे.जब कुछ नहीं हुआ था तब सैनिकों क पीछे हटने का क्या कारण होता हैं.
भारत-चीन के सैनिक लौट रहे वापस, फिंगर 4 तक कोई नहीं करेगा पेट्रोलिंग! चीनी और भारतीय सैनिकों ने लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिण और उत्तर तट से पीछे हटना शुरू कर दिया है. ये दावा है चाइना मिनिस्ट्री ऑफ नेशनल डिफेंस का. चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैन्य कमांडर स्तर की 9वें दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति पर अब अमल शुरू हो गया है., बुधवार (Wednesday) 10 फरवरी को दोनों देशों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है. हैं, भारतीय सेना की ओर से इस तरह का कोई बयान सामने नहीं आया है.
फिंगर 4 को नो पेट्रोलिंग जोन माना गया है, यानी यहां दोंनों ही ओर से पेट्रोलिंग नहीं होगी. चीन की सेना अब फिंगर 8 की तरफ और भारत की सेना धन सिंह थापा पोस्ट (फिंगर 3) की तरफ लौट रही है. दोनों ही देशों के बीच कमांडर लेवल की बातचीत हुई थी, जिसके बाद ये तय हुआ कि चरणबद्ध तरीके से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट जाएंगी. चीनी अखबार ने चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वु कियान के हवाले से कहा है कि दोनों तरफ के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है.
दोनों देशों के बीच मई 2020 में उस वक्त तनाव की स्थिति बनना शुरू हुई थी, जब पैंगोंग झील पर चीन की सेना ने अपना दावा ठोकना चाहा था. भारत की सेना ने इस बात का विरोध किया. इसी दौरान दोनों सेनाओं के बीच झड़प भी हुई थी. 15 जून को चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था. 20 भारतीय सैनिक इस हमले में शहीद हो गए. हालांकि चीन के कितने सैनिक मारे गए, उसने खुलासा नहीं किया.
इसके बाद भारत में चीन विरोधी भावनाएं उबल पड़ीं. दोनों ओर से सीमाओं पर सैनिक बढ़ा दिए गए. हालांकि बातचीत का रास्ता खुला रहा. 8 राउंड की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. अब 9वें दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच एक लंबी सीमा है और कई जगहों पर इसको लेकर विवाद की स्थिति रही है.
चीन सरकार भरोसे मंद नहीं हैं पर हम भी बहुत गफलत में रहते और रखते हैं.सच्चाई हमारे देश में दस पांच साल बाद कोई लिखेगा और वह इतिहास माना जायेगा और इतिहास हमेशा विवाद का विषय रहता हैं.वैसे आज भी अलग अलग टी वी चॅनेल अपने अपने दावे सच बताते हैं.किसकी निष्पक्ष माने.
कोई इतिहास पुरष जब इतिहास लिखेगा वह माना जाएगा वर्तमान में सच्चाई की पुष्टि नहीं होती.
बहुत जानकारी बहुत भरम होता हैं.वैसे भरम में रखना वर्तमान सरकार का काम होता हैं क्योकि आज अपनी गलती मानने कोई तैयार नहीं होगा.बस 1962 का उदहारण देकर अपनी साख बताना काफी होता हैं.
यानी सैनिक गए नहीं थे पर लौट रहे हैं !

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