छह माह से छोटे बच्चे को शहद देना ठीक नहीं


आमतौर पर घरों में छोटे बच्चों के बीमार होने पर घरेलू नुस्खे अपनाये जाते हैं. उन्हीं में केवल एक है शहद. छोटे बच्चों में सर्दी, जुकाम जैसी बीमारियां होने पर उन्हें शहद दिया जाता है. वहीं विशेषज्ञों के अनुसार कफ़ को खत्म करने के लिए शहद पारंपरिक नुस्खा है, पर क्या हर घरेलू नुस्खा बच्चों पर आजमाया जा सकता है यह सोचने की जरूरत है. कोई भी चीज बच्चों को इसलिए खाने के लिए नहीं दी जा सकती क्योंकि वह जड़ी बूटी या घरेलू नुस्खा है.

बच्चों पर हर उस चीज का असर देखने को मिलता है जो भी वो खाते हैं. इसलिए शहद को बच्चों के लिए इस्तेमाल करते समय इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि कहीं बच्चे को शहद से एलर्जी तो नहीं. इसके अलावा छह माह से छोटे किसी भी बच्चे को शहद देना सही नहीं है. वहीं छह महीने से एक साल की उम्र के बीच जब बच्चे को आप बेबी फूड देना शुरू करते हैं तब आप कफ़ के लिए शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन ऐसे में शहद की मात्रा और गुणवत्ता दोनों का ही पूरा ध्यान रखा जाना चाहिये.

रुखेपन से आराम दिलाता है शहद

इसके अलावा शहद में एंटी-इंफेक्टिव गुण भी होते हैं जिससे बच्चे को काफी फायदा मिलता है. शहद में कई गुण होने के बावजूद कई बार उसके अंदर बैक्टीरिया के बीजाणु पाए जाते हैं जिन्हें क्लोसट्रिडियम बोटुलिनम कहा जाता है. जोकि एक खास तरीके की फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकता है हालांकि बड़े लोगों पर इसका कोई खास असर नहीं होता क्योंकि उनका पाचन तंत्र काफी मजबूत होता है लेकिन छोटे बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. शहद में भले ही स्वास्थ्यवर्धक गुण होते होंगे लेकिन 6 माह से कम के बच्चों के लिए इसके उतने ही बुरे प्रभाव हो सकते हैं. इसलिए उनपर यह नुस्खा न आजमायें.

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