राजस्‍थान : हवामहल के रंग रोगन में लग गए आठ साल


जयपुर (jaipur) . वर्ल्‍डहेरिटेज सिटी में शुमार गुलाबी नगरी का 953 जालीदार झरोखे वाले हवामहल में पिछले आठ साल से रंग रोगन मरम्मत का कार्य चल रहा था पर्यटको का ध्यान एक नजर में अपनी ओर आकर्षित करने वाली हवामहल की इमारत को पिछले आठ साल से सजाया सवारा जा रहा था.

हवामहल अधीक्षक सरोज चंचलानी ने बताया कि 2013 में हवामहल का रंग रोगन करवाया गया था. इसके बाद पिछले कई सालों में हवामहल का रंग फीका पडऩे लगा था. इसके अलावा अन्य जर्जर हिस्सों की मरम्मत भी महसूस की जा रही थी. ऐसे में आमेर विकास प्रबंधन प्राधिकरण ने 3 मई को वर्क ऑर्डर जारी किया. इसके बाद हवामहल के निखार का काम जारी है. हवामहल अधीक्षक के मुताबिक हवामहल के रंग रोगन का काम शुरू होने के पहले इसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है. इसके अलावा यहां पिछले करीब 30 साल से रखे गुलाबी रंग के चौके (पत्थर) के अनुसार ही रंग हवामहल पर करवाया जा रहा है.

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इस चौके को कई साल पहले एक कमेटी ने फाइनल किया था. जानकारी के अनुसार यह काम रवि गुप्ता की देखरेख में हो रहा है. 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था निर्माण, पांच मंजिला इमारत को भगवान कृष्ण के मुकुट का आकार दिया हवामहल एक राजसी महल है. इसका निर्माण जयपुर (jaipur)के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था. वे कृष्ण भक्त थे.

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ऐसे में वास्तुकार लालचंद उस्ताद की देखरेख में पांच मंजिला इमारत को भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार में निर्माण करवाया गया. इसे बनाने के लिए लाल व गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया. इसमें 953 आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियां है. पहले राजपरिवार की महिलाएं इन्हीं खिड़कियों से शहर को नजारा देखा करती थी. वेंचुरी प्रभाव की वजह से इन जालीदार झरोखों में हमेशा ठंडी हवा महल के अंदर आती रहती है. यह इमारत हवामहल के नाम से प्रसिद्ध हो गई.

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