2007 के टी20 विश्वकप में भारत को चैंपियन बनाने के बाद सिमट गया जोगिंदर शर्मा का करियर

नई दिल्ली (New Delhi) . 24 अक्टूबर रविवार (Sunday) को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होना है और लोग इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे है. दोनों देशों के लिए यह सिर्फ एक मैच या हार-जीत का सवाल नहीं है. यह एक मुकाबला ऐसा है, जिसमें अच्छे प्रदर्शन के दम पर कोई खिलाड़ी रातों-रात स्टार बन जाता है तो जरा सी गलती करियर पर ग्रहण लगा देती है. आज यानी 23 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान मुकाबले से निकले ऐसे ही एक सितारा खिलाड़ी जोगिंदर शर्मा का जन्मदिन है. उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया को 2007 के टी20 विश्व कप का चैम्पियन बनाया था. लेकिन हैरानी की बात है कि जिस मैच में उन्होंने अपनी गेंदबाजी के दम पर भारत को पहली बार टी20 का चैम्पियन बनाया, वो उनके करियर का आखिरी मुकाबला साबित हुआ. क्योंकि इसके बाद उन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका ही नहीं मिला.

हरियाणा (Haryana) के रोहतक (Rohtak) में 23 अक्टूबर 1983 को पैदा हुए जोगिंदर ने 2007 के टी20 विश्व कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी ओवर डाला था. इस ओवर में पाकिस्तान को जीतने के लिए 13 रन चाहिए थे. जोगिंदर की पहली 2 गेंदों पर 7 रन आए. इसके बाद आखिरी 4 गेंद में 6 रनों की दरकार थी. स्ट्राइक पर मिस्बाह उल हक थे. मिस्बाह ने जोगिंदर की तीसरी गेंद पर शॉर्ट फाइन लेग के ऊपर से स्कूप शॉट खेलने की कोशिश की. लेकिन गेंद सीधा वहां फील्डिंग कर रहे श्रीसंत के हाथों में आई और इस तेज गेंदबाज ने ना सिर्फ कैच पकड़ा, बल्कि विश्व कप भी भारत की झोली में डाल दिया.
हालांकि, इस मैच में भारत की जीत में अहम रोल निभाने के बावजूद जोगिंदर दोबारा कभी भारत के लिए नहीं खेल पाए और बाद में वो हरियाणा (Haryana) पुलिस (Police) में शामिल हो गए और आज बतौर डीएसपी देश सेवा कर रहे. जोगिंदर शर्मा ने 2007 के टी20 वर्ल्ड कप से ही भारत के लिए टी20 डेब्यू किया था. इस टूर्नामेंट में उन्होंने चार मैच खेले थे. फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ मिस्बाह उल हक को आउट कर वे रातों-रात हीरो बन गए. हालांकि, इस टूर्नामेंट के बाद उन्हें फिर कभी भारतीय टी20 टीम में नहीं चुना गया. हालांकि बाद में वे आईपीएल (Indian Premier League) में चेन्नई (Chennai) सुपरकिंग्स के लिए खेले. वे 2012 तक इस टीम का हिस्सा रहे थे.

जोगिंदर को 2004-05 के घरेलू सीजन में रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के चलते भारत की वनडे टीम में चुना गया था. उन्होंने लगातार शतक लगाए और एक मैच में 10 विकेट लिए थे. साथ ही इंडिया-ए की ओर से खेलते हुए इंडिया सीनियर्स के खिलाफ मुकाबले में राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों को भी अपनी स्विंग गेंदबाजी से परेशान किया था. इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए टीम में चुना गया. दौरे के बाद फिर घरेलू क्रिकेट में लौट आए. लेकिन लगातार अच्छे खेल के चलते 2007 की शुरुआत में वेस्ट इंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्हें फिर से टीम इंडिया में जगह मिली. उन्होंने भारत के लिए चार वनडे खेले और एक विकेट लिया. वहीं, इस गेंदबाज ने 4 टी20 में 4 विकेट लिए.

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