दूसरे राज्य जाने वाले मजदूरों का रिकॉर्ड रखें

शिवराज सिंह चौहान का सभी कलेक्टरों को आदेश

भोपाल . मध्य प्रदेश में अगर अब कोई मजदूर दूसरे राज्य में काम के लिए जाता है तो वहां के कलेक्टर को उसका रिकॉर्ड रखना होगा. लॉकडाउन के बाद आई चुनौतियों को लेकर ये फैसला लिया गया है.

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कोरोना वायरस संकट काल के बीच राज्यों के द्वारा लगातार प्रवासी मजदूरों को लेकर फैसले लिए जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश की सरकार के बाद अब मध्य प्रदेश की सरकार ने भी प्रवासी मजदूरों के बाहर काम करने जाने का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी जिला कलेक्टरों को इस रिकॉर्ड को तैयार करने को कहा है.

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि हमने सभी जिला कलेक्टरों को कहा है कि अगर कोई भी मजदूर काम करने के लिए दूसरे राज्य में जाता है, तो उसका रिकॉर्ड रखा जाए. इस रिकॉर्ड के हिसाब से आगे मजदूरों का हिसाब रखा जाएगा ताकि अगर किसी तरह की दिक्‍कत आती है तो प्रदेश सरकार उसपर काम कर सके.



ऐसा ही एक आदेश बीते दिनों योगी सरकार की ओर से दिया गया था. जिसमें कहा गया था कि अगर किसी राज्य में उत्तर प्रदेश के मजदूर जाते हैं, तो वहां की प्रदेश सरकार को यूपी सरकार से इजाजत लेनी होगी. योगी सरकार के इस फैसले पर काफी विवाद हो रहा है और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी उन्हें निशाने पर लिया है.

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प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा, श्रमिकों की मदद करने के बजाय उप्र सरकार का एक हैरतअंगेज फैसला आ गया कि श्रमिकों को उनकी अनुमति के बिना कोई श्रम के लिए नहीं ले सकेगा. क्या सरकार श्रम को बंधुआ बनाएगी? क्या सरकार श्रमिकों से उनके संवैधानिक अधिकार को ख़त्म करना चाहती है?

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गौरतलब है कि लॉकडाउन के बीच लाखों की संख्या में मजदूर अपने राज्यों मे वापस लौटे हैं, जिसके बाद रोजगार का संकट आया है. ऐसे में कई राज्य सरकारों ने श्रम कानून में बदलाव किया है.


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