Thursday , 28 January 2021

9 माह से ठप पडी़ है कोटा की 3000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री, बिगड़ी शहर की अर्थव्यवस्था


कोटा . महामारी (Epidemic) कोरोना ने कारोबार के साथ शिक्षण कार्य से जुड़ी कोटिंग इंडस्ट्री को भी खासा प्रभावित किया है. कोरोनाकाल में राज्य की सरकारों को 15 अक्टूबर के बाद हालात के मद्देनजर कोचिंग सेंटर शुरू किए जाने के दिए गए निर्णय के बाद कई राज्यों ने अब कोचिंग सेंटर्स खोलने की तारिखों की घोषणाएं कर दी हैं. लेकिन राजस्थान (Rajasthan)में अब तक इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है. इससे कोचिंग इंडस्ट्री और इस व्यवसाय से जुड़े लोग अब राजस्थान (Rajasthan)में भी कोचिंग संस्थाओं को खोलने की पुरजोर मांग कर रहे हैं. पिछले 9 महीने से कोचिंग सेंटर्स बंद हैं. इससे कोटा की 3000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री ठप पड़ी है.

  रीको ने विकसित किये औद्योगिक क्षेत्र : कलड़वास में औद्योगिक भूखण्डों का आवंटन ई-नीलामी से 27 से

कोटा में होस्टल संचालकों और निजी कोचिंग संस्थानों सहित अन्य संस्थाओं से जुड़े सदस्यों के संयुक्त मोर्च ने नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द कोचिंग सेंटर्स शुरू करवाने की मांग की है. हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष शुभम अग्रवाल ने बताया है कि हमारे राज्य में कोचिंग शुरू करने में देरी की गई तो इसका सीधा फायदा दूसरे राज्यों के कोचिंग सेंटर को मिलेगा. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में कोटा में कोचिंग सेंटर्स की हालत खस्ताहाल है. इस मामले में देरी किए जाने से कोचिंग और हॉस्टल्स इंडस्ट्री को एक ओर बड़ा झटका लगेगा.

  किसान नेता टिकैत ने दी वायरल वीडियो पर अपनी सफाई

कोटा का आर्थिक पहिया बीते कई महीने से जाम है. हालात यह हैं कि अब कोचिंग और हॉस्टल्स संचालकों के साथ कोचिंग एरिया के व्यापारियों को अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देना मुश्किल हो रहा है. कई कर्मचारियों की नौकरी भी चली गई है. चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के सचिव राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि कोटा में हर साल करीब 1 लाख 65 हजार स्टूडेंटस कोचिंग के लिए आते हैं. शहर में करीब 3000 हॉस्टल्स है ओर 2 हजार से ज्यादा पीजी हैं. इतने ही मैस हैं. इन सभी के सामने लोन की किश्त चुकाने का सकंट तो चल ही रहा है.

इसके साथ ही एक हॉस्टल में औसतन 5 कर्मचारी भी मानें तो करीब 15 हजार लोगों की नौकरी सिर्फ हॉस्टल्स से जा चुकी है. पीजी और मैस के कर्मचारियो को जोड़ा जाए तो आकंड़ा डराने वाला हो जाता है. यही नहीं कोचिंग संस्थानों में काम करने वालें कर्मचारियों के परिवारों पर भी संकट लगातार गहराता जा रहा है. कोटा में सभी छोटी बड़ी कोचिंग में कुल 5 हजार फैकल्टी और 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं जो बीते कई महीनों से आधी या उससे भी कम सैलरी पर गुजारा कर रहे हैं. जल्द ही कोचिंग सेंटर्स नहीं खोले गये तो हालात भयावह हो सकते हैं.

Please share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *