राजस्‍थान का कोचिंग हब कोटा को कोविड ने किया प्रभावित, चरमरा गया ढांचा

कोटा . देश के कोचिंग हब के लिए मशहूर कोटा को कोरोनाकाल में काफी नुकसान उठना पड़ा जिसके चलते यहां संस्थानों के आर्थिक हालत खराब हो गए हैं. कोटा की अनुमानित कमाई कोविड-19 (Covid-19) महामारी (Epidemic) से पहले 1,200 करोड़ रुपये थी, अब नए वेरिएंट के खौफ के कारण अपने मूल्य के एक-चौथाई तक कम हो गई है. कोरोना के नए वैरिएंट की वजह से छात्र (student) शहर छोड़कर ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा ले रहे हैं.

वैकल्पिक आजीविका की तलाश में हजारों कैटर्स, छात्रावास और पीजी मालिक हताश और निराश हैं. कोचिंग हब से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लगभग एक लाख लोग अपनी आजीविका खो चुके हैं. चार दशक पहले कोटा राजस्थान (Rajasthan)का एक औद्योगिक शहर था. हालांकि, बाद में, यह देश के एक प्रमुख कोचिंग सेंटर में बदल गया.

हर वर्ष, देश भर से लगभग डेढ़ लाख छात्र (student) यहां के विभिन्न संस्थानों में अपना पंजीकरण कराते हैं. हालांकि, अब शहर वीरान नजर आता है क्योंकि मुश्किल से 10-15 प्रतिशत छात्र (student) ही रुके हैं. कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने कहा, यह हमारे लिए एक बुरे सपने जैसा है जब सैकड़ों और हजारों छात्र (student) डर और जल्दबाजी में कोटा छोड़ गए हैं. शहर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. केवल 10 प्रतिशत छात्रावासों और पीजी में छात्र (student) हैं. इन छात्रावासों में काम करने वाले लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी हैं, जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी है. साथ ही, हमें अपने ऋण चुकाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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कोटा की 70 फीसदी अर्थव्यवस्था इन छात्रों पर निर्भर हैं, जो प्रति वर्ष लगभग 2 लाख रुपये से 2.50 लाख रुपये खर्च करते हैं. लगभग 3,000 छात्रावासों, 25,000 से अधिक पीजी, लगभग 1,800 मेस और कई कैफे, टिफिन सेंटर, नाश्ते के स्टॉल और अन्य व्यवसायों के साथ, शहर एक कोचिंग हब के रूप में फल-फूल रहा था. यहां के कई निवासियों ने अपने घरों को छात्रावास और पीजी में बदल दिया था. अब लगभग 80 प्रतिशत मेस मालिकों ने शटर गिरा दिए हैं. कोटा मैस एसोसिएशन के अध्यक्ष जशमेश सिंह ने कहा, हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं और अपने मूल स्थानों को वापस चले गए हैं. 4-5 छात्रों के लिए मेस चलाना मुश्किल है, इसलिए उनमें से अधिकांश ने अपने शटर बंद कर दिए हैं.

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महामारी (Epidemic) की पहली लहर के दौरान पिछले साल लगभग 90 प्रतिशत छात्रों ने कोटा छोड़ दिया था. कई राज्यों ने विशेष बसों की व्यवस्था की और छात्रों को शहर से दूर ले जाने के लिए ट्रेनें भी चलाई गईं. हालांकि, जनवरी 2021 ने पुनरुद्धार की उम्मीदें लाईं जब साल के पहले दो महीनों में लगभग 45,000 छात्र (student) कोटा लौट आए. कोचिंग संस्थानों में प्रवेश शुरू हो गए और छात्रों को कोविड के व्यवहार का पालन करने के लिए कहा गया. लेकिन दो महीने में उम्मीदें धराशायी हो गईं क्योंकि विनाशकारी दूसरी लहर ने छात्रों को शहर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और अप्रैल में लगाए गए तालाबंदी के कारण अन्य सभी सुविधाएं बंद हो गईं.

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हालांकि, लॉकडाउन (Lockdown) में ढील दी गई है, लेकिन ऑफलाइन कक्षाएं अभी तक फिर से शुरू नहीं हुई हैं. एक कोचिंग संस्थान के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा कि ऑफलाइन दाखिले में कमी आई है लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं की मांग बढ़ गई है. साथ ही ऑफलाइन क्लासेज चलाने पर उनका खर्च भी काफी कम हो गया है.

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