मछली और झींगे की होगी ‘हॉलमार्किंग’, बनाया जाएगा कानून


कोच्चि . मोदी सरकार मछली और झींगे की ‘हॉलमार्किंग’ करने के लिए एक कानून बनने की तैयारी में है. दरअसल मोदी सरकार यूरोपीय यूनियन के मानदंडों के अनुरूप क्वॉलिटी सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाने जा रही है. यूरोपीय यूनियन भारतीय सीफूड के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार है. भारत से 47,000 करोड़ का सीफूड निर्यात होता है.

इंडस्ट्री जानकारों का कहना है कि कदम से एक्सपोर्ट में तेजी आएगी. कानून के द्वारा सरकार हैचरी से लेकर प्रॉसेसिंग की प्रक्रिया तक मछली और झींगे की क्वॉलिटी पर निगरानी और नियंत्रण रख सकेगी. प्रक्रिया के दौरान ही मछली और झींगों की ग्रोथ को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए उन्हें ऐंटिबायॉटिक्स, हार्मोन्स और अन्य तरह के केमिकल्स दिए जाते हैं. सीफूड में प्रोटीन की काफी मात्रा में पाई जाती है.

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फिशरीज सेक्रटरी रजनी सेखरी ने बताया कि सरकार मछलीपालन से जुड़े हर उत्पाद को प्रमाणित करना चाहती है, ताकि वैश्विक मानदंडों के अनुरूप इनका इस तरह उत्पादन हो कि बीमारी न हो और इनमें केमिकल न हों. रजनी ने कहा, हम प्रॉडक्ट्स की नीलामी होने या बाजार में जाने से पहले उन्हें टैग करने वाले है. यह तभी मुमकिन हो सकेगा जब हमारे पास इसके लिए एक कानून होगा.

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हम सभी इस पर काम कर रहे हैं. सरकार क्वॉलिटी पर सख्त निगरानी रखने के लिए तीन स्तरों प्राइमरी, सेकंडरी और रेफरल लेवल पर लैबोरेटरी नेटवर्क तैयार करेगी. फिशरीज मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा,हमने 28 ऐंटिबायॉटिक्स और अन्य एक्टिव इन्ग्रेडिएंट्स की पहचान की है, जिन पर पाबंदी लग सकती है. कुछ जरूरी एंटिबायॉटिक्स के लिए हमने टॉलरेंस लेवल का सुझाव दिया है.’

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