लेकसिटी में एक फोन पर घर तक पंहुच रही मदिरा : सुरा प्रेमियों की आफत बना लाॅक डाउन, मालामाल हुए शराब माफिया

 

प्रदीप सिंह भाटी
दुनिया वालों किन्तु किसी दिन आ मदिरालय में देखो, दिन को होली रात दिवाली रोज मनाती मधुशाला. प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन की मधुशाला तो सभी ने पड़ी ही होगी. सुराप्रेमियों की पसंदीदा जगह ही मधुशाला है और अगर यह बंद हो जाए तो सोचो क्या होगा ? कोरोना के कहर के चलते जहां पूरे देश में लाॅक डाउन है वहीं आदतन शराब पीने वालों के लिए यह काफी परेशानी भरा है और यह लाॅक डाउन उनकी जेब पर खासा असर डाल रहा है. सभी सुरापे्रमी यही दुआ कर रहे हैं कि कुछ भी हो लेकिन कम से कम दो घण्टे के लिए तो मदिरालय खोल देने चाहिए, और फिल्म स्टार ऋषि कपूर ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट करके गुजारिश भी की हैकि शराब की दुकानें कुछ समय के लिए खुलनी चाहिए है, इसे पीने से चिंता दूर होती है.

नए ठेके खुलना और विभाग से स्टाॅक नहीं आने से हो रही है परेशानी

राज्य सरकार (Government) (State government) की आबकारी नीति के तहत हर दो वर्ष में देशी – अंग्रेजी शराब और बीयर के नए ठेकों की लाॅटरी निकलती है. ऐसे में पूराने ठेेकेदार को 31 मार्च तक पूरा स्टाॅक खाली करना पड़ता है और एक अप्रेल से नए ठेकेदार को अपनी दुकान संभालनी पड़ती हैं, लेकिन कोरोना के कहर के चलते, जैसे ही ‘ जनता कफ्र्यू ’ के बाद प्रदेश लाॅक डाउन हुआ, सभी ठेकेदारों के लिए मानो आफत ही आ गई. फिर अगर बात करें लेकसिटी की तो कई दुकानों में माल खत्म हो गया है और अब सस्ती दारू ही उन ठेकों पर होगी. ऐसे में अब विभाग को सोचना होगा कि जल्द से जल्द शराब की दुकानों को खोला जाए नहीं तो आने वाले दिनों में लाखों रूपए भरकर ठेका लेने वाले नुकसान होने पर शराब को तय दर से भी ज्यादा कीमतों पर बेंचेंगे.

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शराब माफियाओं की हुई पोबारह !

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान शराब की दुकानें बंद हैं, लेकिन सूत्र बताते है कि अवैध रूप अंग्रेजी की ब्रांड शराब का जखीरा शहर के विभिन्न इलाकों में पहुंच गया है और शराब की पेटियों को गुप्त इलाकों में रखा गया है, सुबह सात से 12 की ढील के दौरान सुराप्रेमी अपनी शाम रंगीन करने की व्यवस्था कैसे भी कर ही लेते है. हर दिन डिमांड के हिसाब से इसकी आपूर्ति शहर में कराई जा रही है. हैरत वाली बात है कि इतनी बड़ी मात्रा में रोज अवैध रूप से शराब बेची जा रही है, लेकिन खाकी को इसकी भनक तक नहीं लगी. शहर की पॉश काॅलोनियों से लेकर कच्ची बस्तियों तक अवैध शराब बिक्री का कारोबार खूब फल फूल रहा है.

पेटीएम करो और घर पर ही पाओ मनचाही शराब

लेकसिटी में शराब का कारोबार करने वालों ने लाॅक डाउन के चलते सुराप्रेमियों की सुविधा के लिए सोशल मीडिया (Media) पर फोन नम्बर भी जारी किए गए है. हालाकि पहले फोन करके जगह बतानी होगी, उसी हिसाब से उस शराब की बोटल की रेट भी तय होगी. पहले पेटीएम करके उसका स्क्रीन शाॅट भेजना होगा, कुछ ही देर में बताए गए पते पर मनचाही शराब पंहुच जाएगी. हमारी टीम ने भी इस नम्बर पर सम्पर्क किया और सामने वाले ने होम डिलवरी करने की गारंटी भी पेटीएम करने के बाद दी.

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तीन गुना ज्यादा देने को मजबूर सुरा प्रेमी

लाॅक डाउन का नुकसान जहां हर खासोआम को हुआ है लेकिन शराब माफियाओं की तो बल्ले – बल्ले हो गई है. शराब की विभिन्न ब्रांडों की बाजार दर से तीन गुना ज्यादा वसूलने से भी यह तस्कर नहीं चुक रहे हैं. रॉयल चेलैंज की बोटल 650 रुपए की, ब्लेक में 1300 रुपये बेची जा रही है. इंपीरियल ब्लू की बोटल 540 रूपए की, ब्लेक में 1000 में बेची जा रही है. मैकडोवल व्हिस्की की बोटल 540 रूपए की, ब्लेक में 1000 रूपए में बेची जा रही है. ब्लाइंडर स्प्राइट की बोटल 930 रूपए की, ब्लेक में 1700 रूपए में बेची जा रही है. मैजिक मुवमेंट की बोटल 600 रूपए की, ब्लेक में 1000 रूपए में बेची जा रही है. हंड्रेड पाइपर की बोटल 1850 रूपए की, ब्लेक में 3000 रूपए में बेची जा रही है. सिग्नेचर ब्लू की बोटल 930 रूपए की, ब्लेक में 2400 रुपये में बेची जा रही है. वहीं बीयर की बोटल 130 रूपए की, ब्लेक में 400 रूपए में बेची जा रही है.

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परेशान सुरा प्रेमी और ठेकदारों ने बताई पीड़ा

– रोज एक क्वार्टर तो पीना ही पड़ता है, शुक्र इस बात का है कि ठेकेदार जानता है, इसलिए प्यास तो बुझ जाती है लेकिन यह प्यास बहुत महंगी है.
कुलदीप सिंह – बदला हुआ नाम

– हमेशा ऊंची ब्रांड की ही दारू पी है, लेकिन लाॅक डाउन के बाद तो ब्रांड खत्म हो गई है या बहुत ज्यादा महंगी मिल रही है. इसलिए छोटी ब्रांड की शराब भी चल जाती है.
पुनित – बदला हुआ नाम

लाॅक डाउन के चलते दुकाने खोल नहीं पा रहे है. सभी संचालकों को फोर्थ क्वार्टर लाॅस हुआ है और नए ठेका संचालकों को भी काफी नुकसान हुआ है. 22 लाख रूपए की सालाना फीस एक साथ ही ले ली गई है. कब तक दुकाने खुलेगी और कब तक माल उठा सकेंगे यह तो सरकार (Government) ही बता सकती है, लेकिन 2020 में ठेका मालिकों को काफी नुकसान उठाना पडेगा.
बंशीलाल सुहालका, ठेकेदार, उदयपुर (Udaipur)

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