मेवाड़ अधिपति परमेश्‍वरांजी महाराज श्री एकलिंगनाथ जी सुखियां सोमवार को पचरंगी लेहरियां से सुशोभित

उदयपुर (Udaipur). श्रावण मास में भगवान शिव के दर्शनों एवं पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. भगवान एकलिंगनाथजी मेवाड़ के महाराणाओं के इष्टदेव है. इस वर्ष कोरोना महामारी (Epidemic) के चलते सावन मास में भक्तों को दर्शन नहीं हो पा रहे हैं. इसी कारण महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर (Udaipur) अपने अभिलेखीय संग्रह से सावन मास में सोमवार (Monday) को होने वाले मेवाड़ अधिपति श्री एकलिंगनाथ जी का चित्र भक्तों के दर्शन हेतु उपलब्ध करवाया है.

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एकलिंगनाथ जी के मंदिर के दक्षिण में लगी प्रशस्ति के अनुसार भगवान एकलिंगनाथ जी की सुन्दर और सुदृढ़ श्यामपाषाण निर्मित पंचमुखी प्रतिमा की स्थापना एवं प्रतिष्ठा मेवाड़ के महाराणा रायमल ने करवाई थी. शास्त्रों के अनुसार इस पंचमुखी प्रतिमा के पश्चिम में ब्रह्मा, उत्तर में विष्णु, पूर्व में सूर्य एवं दक्षिण में रूद्र है. इन चारों मुखों के बीच में उभरा हुआ शिवलिंग सच्चिदानंद भगवान श्री साम्ब सदाशिव का विग्रह है. भगवान एकलिंगनाथ जी मेवाड़ के शासक माने जाते है और महाराणा उनके दीवान.

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वर्ष भर प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा एवं आरतियां होती हैं. प्रत्येक वार-तिथि-माह, ऋतु के अनुरूप पूजा में सेवा-शृृंगार होता है. ऋतुओं के अनुसार भगवान को पोशाक धारण करवाई जाती है, जिनमें सावन में लेहरियां धारण करवाने की परम्परा है. इस सुखिया सोमवार (Monday) को भगवान एकलिंगनाथजी को पचरंगी लेहरियां धारण किये हुए के दर्शन अभिलेखीय चित्र द्वारा दर्शित है.

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