राजस्थान में बीते 6 दशकों के बाद टिड्डों का कहर, लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद


जयपुर. राजस्थान में किसानों को इस बार अपनी फसल पर टिड्डों के भीषण हमले का कहर झेलना पड़ा जिसके चलते पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों के कम से कम 3.6 लाख हेक्टेयर की फसल की बर्बादी देखनी पड़ी है और अभी यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है. बताया जा रहा है कि पिछले 60 सालों में यह नुकसान सबसे ज्यादा है. कई जिलों में तो आधे से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गई हैं और किसान इनके आगे लाचार नजर आ रहे हैं.

अधिकारियों और किसानों ने बताया कि श्रीगंगानगर जिले में टिड्डों ने खेतों में खड़ी फसल का 75 फीसदी हिस्सा बर्बाद कर दिया है. श्रीगंगानगर के अलावा हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जलोड़, सिरोही, नागौर और चुरू में भी टिड्डों ने फसलों को बुरी तरह से चट कर लिया है. पिछले साल टिड्डों का पहला हमला मई में सामने आया था, दक्षिणी पाकिस्तान से आए गुलाबी टिड्डों ने 10 जिलों में खरीफ (जुलाई से सितंबर) की फसल को तबाह कर दिया था. अब रबी (अक्टूबर-मार्च) की फसलों पर भी टिड्डों के हमले ने किसानों की कमर तोड़ दी है. किसानों का कहना है कि दो हफ्ते पहले शुरू हुआ टिड्डों का हमला आज भी जारी है.

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कई किसानों ने बताया कि इस बार का नुकसान और टिड्डों का हमला बहुत खतरनाक और अब तक का सबसे बड़ा है. टिड्डे गेहूं, जौ, सरसो, जीरा और कई अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. बीकानेर जिले के श्याम सोमरा कहते हैं, ‘टिड्डे पूरे पौधे नहीं खा रहे बल्कि फूलों को चबा डाल रहे हैं, इससे फसल पूरी तरह से तबाह हो जा रही है.’ किसान संघर्ष समिति के सुभाष सहगल ने कहा, ‘मई 2019 में टिड्डों के पहले हमले के बाद से कृषि विभाग, टिड्डा नियंत्रण संस्थान (एलसीओ) और अन्य संस्थान सिर्फ कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं. अगर ये पाकिस्तान में पैदा हो रहे हैं तो राजस्थान सरकार को केंद्र से अपील करनी चाहिए कि वह पाकिस्तान की सरकार से इसके नियंत्रण के लिए बात करे.’

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एलसीओ जोधपुर के डेप्युटी डायरेक्टर के एल गुर्जर नुकसान के बारे में बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों के गांवों में जाकर सर्वे कर रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘मुझे लगता है कि जैसलमेर और श्रीगंगानगर में खतरा नियंत्रण में है. इस साल बढ़िया मॉनसून, हरियाली और नमी के चलते ही इतनी भारी मात्रा में टिड्डों ने हमला बोल दिया. हमारे पास पर्याप्त मात्रा में कीटनाशक है और हम टिड्डों को ट्रैक करके उन्हें रोकने का प्रयास कर रहे हैं.’

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वहीं, किसानों का आरोप है कि पिछले आठ महीनों में राज्य सरकार ने ना तो मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की है और ना ही इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम ही उठाया है. श्रीगंगानगर जिले के किसान सोहा लाल बिश्नोई कहते हैं कि सरकारी संस्थाओं के लोग आ रहे हैं तो सिर्फ फोटो खींचकर चले जाते हैं. श्रीगंगानगर में लगभग एक लाख हेक्टेयर और अन्य नौ जिलों को मिलाकर कुल 2.6 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. किसानों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है, साथ ही हर किसानों को 20 हजार रुपये का मुआवजा भी दिए जाने की अपील की है.

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