हत्या-अपहरण के मामले अपराध सूची में होंगे आगे

नई दिल्ली. केंद्र सरकार आईपीसी और सीआरपीसी में देश की जरूरतों व प्राथमिकताओं के मुताबिक बदलाव करना चाहती है. इसमें हत्या, दुष्कर्म और बच्चों के अपहरण जैसे मामलों को प्राथमिकता सूची में रखते हुए कानूनी बदलाव किए जाएंगे. पहले तय की गई सजा में भी अपराध की प्रकृति के आधार पर बदलाव करने की मंशा है. सरकार सभी भागीदार पक्षों से विचार विमर्श के बाद संशोधनों को अंतिम रूप देगी.

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सूत्रों ने कहा कि सरकार की मंशा ब्रिटिश हुकूमत के समय बने कानून में तब्दीली करने की है. एक अधिकारी ने कहा कि उस समय की प्राथमिकताओं और आज की प्राथमिकता में फर्क है. ब्रिटिश हुकूमत के वक्त लूट जैसे अपराध को बहुत संगीन मानकर अपराधों की सूची में पहले रखा गया था, जबकि हत्या से जुड़े अपराध की सभी धाराएं 300 के बाद हैं. सरकार इस क्रम को प्राथमिकता के आधार पर बदलना चाहती है. एक अधिकारी ने कहा कि हथियार बनाने और हथियार रखने दोनों की सजा एक जैसी नहीं हो सकती.

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सूत्रों का कहना है कि सरकार का मानना है कि आईपीसी और सीआरपीसी को मौजूदा चुनौतियों व जरूरतों के मुताबिक तर्कसंगत बनाया जाए. समाज में जिस तरह के नए अपराध की प्रवृत्ति पनप रही है उनको भी इसमें जगह देकर पर्याप्त दंडात्मक उपाय किए जाएं. इस दिशा में काम शुरू हो चुका है. अभी आरंभिक काम किए जा रहे हैं. जिन मामलों में पहले से संशोधनों के जरिये कठोर प्रावधान किए जा चुके हैं उनको किस तरह से नई व्यवस्था में सूचीबद्ध किया जाएगा इस पर चर्चा होगा.

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