श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों में श्रमिकों की मौत की संख्या नहीं हैं रेलवे के पास


नई दिल्ली (New Delhi). रेलवे (Railway)बोर्ड के चेेेेयरमैन वीके यादव ने श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों में श्रमिकों की मौत पर कहा कि बिना सटीक आंकड़ों के संख्‍या को नहीं बताया जा सकता. उन्होंने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि ट्रेन में हुई मौतों पर हमें अफसोस है.

कई श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों के कई दिनों बाद अपने निर्धारित स्‍थान पर पहुंचने की खबर पर उन्‍होंंने कहा कि 3840 ट्रेनों में से 4 ट्रेन ही ऐसी हैं जिन्‍होंने लक्ष्‍य तक पहुंचने में 72 घंटे से ज़्यादा का वक़्त लिया. ये भी 4 दिन से ज़्यादा समय में पहुंच गई. उन्‍होंने साफ किया कि एक ट्रेन के 9 दिन में पहुंचने संबंधी खबर झूठी है. मंत्रालय के अनुसार, 3840 में से 1.8% ट्रेन यानी 71 ट्रेन ही डाइवर्ट की गईं और ये डायवर्सन भी 20-24 मई के दौरान ही हुआ. इसी दौरान अधिक व्‍यस्‍तता रही. मंत्रालय के अनुसार, इस बीच 90% ट्रेन यूपी और बिहार जाने वाले ही थीं, इनमें से 3 दिन से ज़्यादा वक़्त सिर्फ 4 ट्रेनों ने लिया.

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रेलवे (Railway)बोर्ड के चेयरमैन ने दावा किया कि पिछले हफ्ते 20 लाख मुसाफिरों को पहुंचाया गया, औसतन रोजाना करीब 3 लाख. 3840 में से 3836 ट्रेनों ने 72 घण्टे से कम का वक़्त लिया. 90% यानी 3500 ट्रेन मेल एक्सप्रेस की एवरेज स्पीड से ज़्यादा पर गई है, केवल 10% ट्रेन 5 घंटे या उससे ज़्यादा लेट हुई. मंत्रालय के अनुसार, श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों में 30 से ज़्यादा डिलीवरी करवाई गई है. अब श्रमिक ट्रेन की मांग कम हुई है.

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