‘‘तनाव प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन’’

उदयपुर. म.प्र.कृ.प्रौ.विश्वविद्यालय के संघटक समुदाय एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की संस्थागत विकास योजना ;प्क्च्द्ध ध् राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना ;छ.भ्म्च्द्ध अन्तर्गत तनाव एवं खुशी पर एक दिवसीय कार्यशाला ‘‘जिन्दगी शुन्य के बाद भी है: खुशियाँ बढ़ाना और छात्रों को सहनशील एवं लचीला बनाना’’ का आयोजन किया गया. इस अवसर पर समुदाय एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. ़ऋतु सिंघवी नें अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया.

इस अवसर के मुख्य वक्ता डाॅ. ममता मिश्रा, प्रिन्सिपल, टैगोर गल्र्स काॅलेज जयपुर ओर डाॅ. हर्षिका पारिक, सहायक प्राध्यापक, श्रम्ब्त्ब् विश्वविद्यालय, जयपुर एवं डाॅ. कुमुदिनी चांवरिया, वित्त नियत्रंक म.प्र.कृ.प्रौ.वि.,उदयपुर थे. कार्यशाला इन्टरेटिव गतिविधियों ओर खेलों का एक संयोजन था जो छात्रों में तनाव के लक्षणों की पहचान कर उनका समाधान निकालने पर केन्द्रित था. डाॅ. ममता मिश्रा ने छात्रों को रोल प्ले के माध्यम से किशोरांे की समस्याओं का समाधान करवाया. उन्होनें छात्रों के साथ एक इन्टरेटिव सत्र भी किया जिसमें उनकी शक्ति और कमजोरीयों की चर्चा की गई जिससे छात्र तनाव से लड़ सके. उन्होनें अपना सत्र सकारात्मक सोच के साथ समाप्त कर सभी प्रतिभागियों को एक दुसरे के बारे में सकारात्मक टिप्पणी करने के लिये प्रेरित किया.

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दुसरी और डाॅ. हर्षिका पारिक ने जिन्दगी शुन्य के बाद भी है सत्र को प्रसिद्ध सकारात्मक मनोवैज्ञानिक मार्टिन सेलिगमेन द्वारा दी गई एक अवधारणा बताया. उन्होेने छात्रों को पिछले दिन की गतिविधियों को एक पेपर पर लिखनें को कहा और यह बताया कि वे पूरे दिन में कितनें सकारात्मक या नकारात्मक थे. यह सत्र हर दिन सकारात्मक सोच पर केन्द्रित था जिससे खुशी के अवसर मिले ओर जीवन शुन्य से उपर उठकर सार्थक हो. उन्होने छात्रों को एक पत्थर में अपनी सभी सकारात्मक उर्जा को स्थानातरित करने ओर जीवन को याद दिलाने के लिये एक यादगार प्राकृतिक सुन्दर निधि के रूप मेे रखने के साथ अपने सत्र को समापन किया.

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डाॅ. कुमुदिनी चांवरिया, ने प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में उपयोग किये जाने वाले कार्यो को प्रंबधित करने, लक्ष्य को बिना ध्यान भटकाए भेदने के प्रभावी टिप्स दिये. डाॅ. सीमा द्विवेदी, कार्यशाला संयोजिका ने वर्तमान परिदृश्य में छात्र तनाव का रोल प्ले के द्वारा मंचन करवाया. डाॅ. सुमन औदिच्य नें सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया. डाॅ. जयमाला दवे ने कार्यशाला के संचालन में सक्रिय योगदान दिया. छात्रों ने इस कार्यशाला को अभूतपूर्व ज्ञानवर्धन बताया जिससे तनावों मे कमी आकर आत्मविश्वास बढ़ा.

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