ढांचागत सुधार के लिए आईएमएफ से 50 करोड़ डालर का कर्ज लेगा पाकिस्तान

इस्‍लामाबाद . ‘नया पाकिस्‍तान’ बनाने का वादा करके सत्‍ता में आए पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जैसे तय कर लिया है कि वह पाकिस्‍तान को कर्ज में डूबोकर ही मानेंगे. सत्‍ता में आने से पहले इमरान ने वादा किया था कि वह विदेशी संस्‍थाओं से कर्ज लेने की संस्‍कृति पर रोक लगाएंगे, लेकिन अब वह खुद ही कर्ज पर कर्ज लिए जा रहे हैं. ताजा मामला अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष का है, जिससे पाकिस्‍तान 50 करोड़ डॉलर (Dollar) कर्ज लेने जा रहा है.

वह भी तब जब हर पाकिस्‍तानी नागरिक पर अब 1 लाख 75 हजार रुपए का कर्ज है. पाकिस्‍तान सरकार और आईएमएफ के बीच मंगलवार (Tuesday) को सुधारों को लेकर एक समझौता हुआ है. इस समझौते के बाद अब पाकिस्‍तान को आईएमएफ से 50 करोड़ डॉलर (Dollar) कर्ज मिलने का रास्‍ता साफ हो गया है. पाकिस्‍तान के वित्‍त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि अर्थव्‍यवस्‍था को मदद दी जाएगी और ढांचागत सुधार किए जाएंगे. वित्‍त मंत्री अब्‍दुल हाफ‍िज शेख ने कहा कि यह पाकिस्‍तान के लिए अच्‍छी खबर है.

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पाकिस्‍तान यह कर्ज ऐसे समय पर ले रहा है जब हाल में ही पाकिस्तान की संसद में इमरान खान सरकार ने कबूल किया है कि अब हर पाकिस्तानी के ऊपर अब एक लाख 75 हजार रुपए का कर्ज है. इसमें इमरान खान की सरकार का योगदान 54901 रुपए है, जो कर्ज की कुल राशि का 46 फीसदी है. कर्ज का यह बोझ पाकिस्तानियों के ऊपर पिछले दो साल में बढ़ा है. यानी जब इमरान ने पाकिस्तान की सत्ता संभाली थी तब देश के हर नागरिक के ऊपर 120099 रुपए का कर्ज था. वित्त वर्ष 2020-21 के राजकोषीय नीति पर बयान देते हुए पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने माना है कि इमरान खान सरकार राजकोषीय घाटे को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के चार फीसदी तक करने में विफल रही है.

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इस तरह सरकार ने 2005 की राजकोषीय जिम्मेदारी और ऋण सीमा (एफआरडीएल) अधिनियम का उल्लंघन किया है. ऐसे में पाकिस्तान का कुल रोजकोषीय घाटा जीडीपी का 8.6 फीसदी रहा है, जो एफआरडीएल अधिनियम कानून की सीमा से दोगुने से भी अधिक है. पाकिस्तान ने देश के ऊपर बढ़ते विदेशी कर्ज से निपटने के लिए की राजकोषीय जिम्मेदारी और ऋण सीमा (एफआरडीएल) अधिनियम को साल 2005 में पारित किया था. इसमें प्रावधान किया गया था कि राजकोषीय घाटा देश की अर्थव्यवस्था से चार फीसदी से ज्यादा न हो. इसमें यह भी कहा गया था कि राजकोष को लेकर सरकार की सभी नीतियों को गहराई से अध्ययन भी किया जाए.

पाकिस्तान की संसद में यह रिपोर्ट गुरुवार (Thursday) को पेश की गई थी. पाकिस्तान के इतिहास में इस रिपोर्ट को सबसे कम जानकारी वाला नीतिगत बयान बताया जा रहा है. अधिकारियों ने कहा कि ऋण नीति कार्यालय ने वित्त मंत्रालय को नीति का एक विस्तृत मसौदा पेश किया था. हालांकि, उन्हें आदेश दिया गया कि इस रिपोर्ट को शीर्षक सहित केवल 11 पन्नों में ही समेटा जाए.

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दो वर्षों के राजकोषीय नीति विवरण में बताया गया है कि इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के कार्यकाल के दौरान लोगों के ऊपर 54,901 रुपए का कर्ज बढ़ा है. जून 2018 में पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक ऋण 120,099 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए था. इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार के पहले साल कर्ज की यह राशि 28 फीसदी बढ़कर 33,590 ट्रिलियन रुपए हो गई, जबकि उसके अगले साल यह कर्ज 14 फीसदी और बढ़ गया.

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