नागा साधुओं की तपोस्थली है पातालेश्वर धाम : शिवरात्रि पर लगेगा मिनी महादेव मेला


छिंदवाड़ा. शहर का पातालेश्वर धाम नागा साधुओं की तपोस्थली है यह वह स्थल है जहां पाताल से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ था और नागा साधुओं ने इसे पातालेश्वर नाम दिया था.पातालेश्वर धाम शहर के बसने के इतिहास से जुड़ा है पहले यहां घना जंगल था आबादी का नामोनिशान नही था तब नागासाधुओं ने यहां डेरा डालकर भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए इस स्थान को चुना था. नागा साधु आमतोर पर बस्तियों में और लोगों के बीच नही रहते है. शहर की बसीकत बढ़ने के साथ ही पातालेश्वर धाम अस्तित्व में आया और शहर वासी भी यहां पूजा अर्चना के लिए जाने लगे हर साल महाशिवरात्रि पर यहां महादेव मेला लगता है इस मेले को 100 साल से ज्यादा का समय हो गया है.

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महाशिवरात्रि का दिन पातालेश्वर के लिए ऐसा होता है कि यहां बिना बुलाए ही हजारों की संख्या में भोले के भक्त एकत्र होते है पातालेश्वर धाम की सेवा में गोसांई सम्प्रदाय के साधु भी रहे है और पातालेश्वर धाम में ही उनकी समाधियां भी है. पिछले तीन दशक से पातालेश्वर धाम प्रबंधकार्यकारिणी समिति यहां मेले की व्यवस्था को संभाल रही है समिति के प्रयास से पातालेश्वर धाम का कायाकल्प भी हो गया है. नगर निगम सांसद मद,िवधायक मद सहित अनेक मदों से यहां मंदिर, बावली सहित मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्माण किए जा चुके है.

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पहले था घना जंगल अब है तीन वार्डों की घनी बस्ती –

शहर बसने से पहले पातालेश्वर धाम क्षेत्र घना जंगल था यहां कोई आबादी नही थी जब यहां बस्ती बसना शुरू हुई तब रेलवे कॉलोनी के नाम से कुछ आवास बने थे इसके बाद फिर आमजनों का भी यहां बसेरा हुआ और आज के दौर में पातालेश्वर क्षेत्र में शहर के तीन वार्ड राजेन्द्र नगर, अंबेडकर वार्ड और पातालेश्वर वार्ड है. पातालेश्वर वार्ड में ही हिन्दुओं का मोक्ष धाम है जो पातालेश्वर धाम से भी पुराना है. मोक्षधाम के समीप ही पातालेश्वर धाम है और माना जाता है कि संभवत: इसी वजह से नागा साधुओं ने इस क्षेत्र में रहकर शिव तप किया था.

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