आरोपी बिशप फ्रैंको मुलाक्कल की बरी करने की याचिका सुप्रीमकोर्ट में भी खारिज


-केरल की नन ने लगाया है यौन शोषण का आरोप, बिशप को हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत

नई दिल्ली (New Delhi). उच्चतम न्यायालय ने एक नन से बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलाक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार (Wednesday) को खारिज कर दी. इस बिशप पर नन ने बलात्कार का आरोप लगाया है. प्रधान न्यायाधीश (judge) एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है, लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है.

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मुलाक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बलात्कार के इस मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. केरल में डायोसिस की नन ने जून, 2018 में की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बिशप ने 2014 से 2016 के दौरान उसका यौन शोषण किया. नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था.

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इस मामले की जांच करने वाले विशेष जांच दल ने बिशप को गिरफ्तार भी किया था. बिशप पर बलपूर्वक नन को रोकने, बलात्कार करने, अप्राकृतिक यौनाचार करने और धमकाने के आरोप लगाये थे. इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलाक्कल को बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया था. उच्च न्यायालय ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया था कि मुलाक्कल के खिलाफ पहली नजर में बलात्कार का मामला बनता है. न्यायमूर्ति वी. शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह सुनवाई का सामना करे.

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