राजस्‍थान उच्च न्यायालय ने दी राहत : वन विभाग अधिकारियो की गिरफ्तारी पर रोक


जोधपुर. वन विभाग के अधिकारियों एवं जीव रक्षा संस्था के बीच चल रहे प्रकरण में उच्च न्यायालय ने वन विभाग के अधिकारियों को राहत प्रदान कर उनकी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश दिये है.

बीकानेर निवासी वन कर्मचारी किशोर सिंह एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता ऋतुराज सिंह ने न्यायालय को बताया की कोरोना काल में वन सेवाओं को भी आपातकालीन सेवाओं में जोड़ा गया था. यह कि अधिकारियो को गांव सुरजड़ा तहसील कोलायत में चिंकारा शिकार की सुचना मिली थी, जिस पर वो जाब्ते सहित मोके पर पहुंचे एवं चिंकारा के शव को कब्जे में ले विभाग की गाडी में डाल दिये. उसी समय जीव रक्षा संस्था (बीकानेर) के 25-30 लोग मोके पर पहुंचे व अधिकारियो के साथ मारपीट कर उनकी वर्दी फाड़ दी एवं चिंकारा के शव को जबरन उठा कर ले गए. इसके खिलाफ अधिकारियो ने 9 मई 20 को जीव रक्षा संस्था (बीकानेर) के सदस्यों के खिलाफ गजनेर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया.

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न्यायालय को यह भी बताया गया की अधिकारियो पर दबाव बनाने के लिए वन विभाग अधिकारियो पर भी प्रतिवादी द्वारा एससी एसटी एक्ट के तहत क्रॉस मुकदमा दर्ज कराया गया, जो की प्रतिवादी खुद खारिया पातावतान का निवासी है जो सुरजड़ा ग्राम जहां घटना घटित हुई वहा से लगभग 100 किमी दूर है एवं घटना वाले समय प्रतिवादी खुद के गांव में ही मौजूद था. इस प्रकरण पश्चात प्रतिवादी के लिए पैसा इक्ट्ठा कर मोटरसाइकिल तक दिलवाई गई. न्यायालय को बताया गया की इस संस्था द्वारा पूर्व में भी कई बार वन विभाग कर्मचारियों के साथ बदसलूकी, मारपीट आदि की गई है, जिसके कारण राजस्थान संयुक्त वन कर्मचारी संघ द्वारा कई बार ज्ञापन एवं हड़ताल आदि किये गए. मुख्य वन संरक्षक द्वारा भी इस सम्बन्ध में कई बार उच्च अधिकारियो को लिखा जा चुका है. अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के पश्चात न्यायाधीश (judge) पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगते हुवे जवाब तलब किया.

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