खुदरा महंगाई दर नियंत्रित करने ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा आरबीआई

नई दिल्ली . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) खुदरा महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती न करने समेत कुछ कड़े कदम उठा सकता है. इसका कारण है कि दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 5 साल के रेकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है. प्याज और टमाटर समेत कई सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 7.35 फीसदी दर्ज की गई. यह आरबीआई के अनुमान से कहीं ज्यादा है. हालांकि कोर महंगाई दर अभी 3.7 फीसदी है, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है.

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विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों में तेजी का सीधा असर 6 फरवरी को रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी की समीक्षा में दिखाई दे सकता है. आम बजट भी इससे अछूता नहीं रहेगा. दिसंबर में भी मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने महंगाई के बढ़ने की आशंका के चलते रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया था. इकरा की प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट अदिति नायर का मानना है कि दिसंबर की खुदरा महंगाई के आंकड़े अनुमान से काफी ज्यादा है. आशंका थी कि खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी से थोड़ा ऊपर रहेगी, लेकिन इसने 7 फीसदी का लेवल पार कर लिया.

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इसका मतलब है कि इसका जल्द नीचे आना मुश्किल है. ऐसे में 6 फरवरी को एमपीसी के लिए कोई भी फैसला काफी मुश्किल होगा. आरबीआई को ग्रोथ रेट और ब्याज दरों के बीच बैलेंस बनाना काफी चुनौतीपूर्ण काम है. जुलाई-2014 में खुदरा महंगाई दर में 7.39 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. पिछले महीने यानी नवंबर में खुदरा महंगाई की दर 5.54 फीसदी थी, जबकि दिसंबर-2018 में यह दर 2.11 फीसदी थी.

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