लोकतंत्र में बहुमत का सम्मान आवश्यक, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं : उपराष्ट्रपति


नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रोटरी इंटरनेशनल के सौवें वर्ष के समारोह भाग लेते हुए कहा कि विकास और समृद्धि के लिए शांति जरूरी है. आतंकवाद विश्व शांति और मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है. उन्होंने रोटरी जैसी संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे आतंकवाद के विरुद्ध विश्वमत बनाएं. उन्होंने लोगों से अपनी भाषा, जन्मभूमि तथा पारिवारिक संस्कारों से जुड़े रह कर वसुधैव कुटुंबकम् के विश्व दर्शन को आत्मसात करने का आह्वाहन किया. उन्होंने भारत सरकार के साथ मिल कर, पोलियो उन्मूलन अभियान में रोटरी की भूमिका की सराहना की.

उन्होंने कहा कि भारत के पोलियो उन्मूलन के अभियान ने साबित कर दिया है कि सरकार और प्रतिबद्ध गैर सरकारी संगठनों की सहभागिता से जनकल्याण के अभियान को सफल बनाया जा सकता है. उन्होंने रोटरी द्वारा जल संरक्षण, साक्षरता, प्रौढ़ शिक्षा,गरीब महिलाओं के प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों की सराहना की. उन्होंने कहा कि शेयर एंड केयर का संस्कार भारतीय जीवन दर्शन में निहित है. उन्होंने आग्रह किया कि रोटरी इंटरनेशनल जैसे स्वयं सेवी संगठन ग्रामीण भारत की समस्याओं के समाधान हेतु आगे आएं.उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मूलतः ग्रामीण है, हमारे संस्कारों की जड़ें ग्रामीण संस्कृति में जमीं हैं.उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से महात्मा गांधी के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने को कहा. राष्ट्रपिता का विश्वास था कि भारत की आत्मा गावों में बसती है. महात्मा गांधी का जीवन ही नि:स्वार्थ, रचनात्मक जन सेवा की प्रेरणा देता है.

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उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि लाभकारी व्यवसाय नहीं रह गया है, उन्होंने आशा व्यक्त की कि रोटरी ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित उद्यमों और व्यवसायों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधीकरण के लिए प्रशिक्षित करेगा जिससे किसानों को नियमित आमदनी मिलती रहे और उसे मौसम की दया पर निर्भर न रहना पड़े. समाज के विकास के लिए शांति की अनिवार्यता पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा कि विश्व भर में शांति और सौहार्द्र का प्रसार करना रोटरी जैसे स्वंयसेवी संगठनों का उद्देश्य रहा है. उन्होंने कहा कि विकास के लिए शांति आवश्यक शर्त है. यह ज़रूरी है कि नागरिक विशेषकर हमारे युवा जीवन के प्रति सकारात्मक रचनात्मक दृष्टिकोण रखें. उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज स्वंयसेवी संगठनों से अपेक्षा रखता है कि वे स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, योग, फिट इंडिया, पोषण अभियान जैसे रचनात्मक समाजिक आंदोलनों में अनुकरणीय अग्रणी भूमिका निभाएंगे. ये संगठन सामाजिक और लैंगिक भेदभाव जैसे कुरीतियों के विरुद्ध जन जागृति करें.

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समाज में रचनात्मकता और सकारात्मकता का माहौल बनाएं और जन सामान्य को समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने के लिए प्रेरित करें. यह सकारात्मकता ही हमारी अंतर्निहित रचनात्मकता को प्रेरित करेगी. उन्होंने कहा कि आज की उपमोक्ता वादी सामाजिक संस्कृति में जरूरी है कि करुणा, दया और बंधुत्व के संस्कार बचपन से दिए जाएं. आज के प्रतिस्पर्धात्मक सामाजिक परिवेश में समाज सेवा और आध्यात्मिकता जैसे संस्कारों को शुरुआत से ही परिवारों में दिया जाना चाहिए. यद्यपि देश में एनएसएस जैसे रचनात्मक छात्र संस्थाएं है फिर भी युवा छात्रों और समाज के बीच और गहरा संवाद होना चाहिए, युवाओं को सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए. उन्होंने अपेक्षा की कि नई शिक्षा नीति युवाओं में समाज सेवा के संस्कार पैदा करेगी.

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